उत्तर रेलवे ने स्क्रैप बेचकर रिकॉर्ड 781.07 करोड़ रुपये की कमाई, यात्री सुविधाओं और सुरक्षा में होगा निवेश

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उत्तर रेलवे ने स्क्रैप बेचकर रिकॉर्ड 781.07 करोड़ रुपये की कमाई, यात्री सुविधाओं और सुरक्षा में होगा निवेश

भारतीय रेलवे के उत्तर रेलवे जोन ने वित्त वर्ष 2024-25 में स्क्रैप (कबाड़) बेचकर 781.07 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक कमाई की है। यह न केवल भारतीय रेलवे के सभी जोनों और उत्पादन इकाइयों में सबसे अधिक है, बल्कि यह उत्तर रेलवे के इतिहास की भी अब तक की सबसे बड़ी स्क्रैप बिक्री है।

उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा के अनुसार, यह स्क्रैप निपटान केवल कमाई का जरिया नहीं था, बल्कि इसे एक मिशन के रूप में चलाया गया। इसका उद्देश्य रेलवे परिसरों को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाना भी था।

इस कमाई का उपयोग यात्रियों के लिए सुविधाओं के विस्तार और सुरक्षा उपायों को बेहतर करने में किया जाएगा। इसमें स्टेशनों का आधुनिकीकरण, नए प्लेटफॉर्म का निर्माण, बेहतर लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे, आधुनिक सुरक्षा उपकरण, वेटिंग एरिया, स्वच्छ शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था, और ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

लक्ष्य से 147% ज्यादा कमाई

रेलवे बोर्ड ने उत्तर रेलवे के लिए 530 करोड़ रुपये का वार्षिक स्क्रैप बिक्री लक्ष्य तय किया था, लेकिन उत्तर रेलवे ने इसे पार करते हुए 781.07 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। यह लक्ष्य का 147.36 प्रतिशत है।

सुरक्षा में भी सुधार

रेलवे ट्रैकों और स्टेशनों के आसपास पड़े पुराने स्क्रैप जैसे रेल टुकड़े, स्लीपर, टाई बार आदि को हटाने से ट्रेनों की आवाजाही पहले से ज्यादा सुरक्षित हो गई है। साथ ही छोटी जगहों में रखे अनुपयोगी ढांचे जैसे पुराने स्टाफ क्वार्टर, केबिन और शेड को हटाकर यात्री सुविधाओं के लिए जगह बनाई गई है, जिससे भीड़भाड़ कम होगी और यात्री अनुभव बेहतर होगा।

स्क्रैप निपटान की प्रमुख उपलब्धियां

  • उत्तर रेलवे ने 8 स्थानों से 592 ई-नीलामी के माध्यम से कुल 3244 लॉट स्क्रैप बेचे।
  • उत्तर रेलवे लगातार चौथे वर्ष 600 करोड़ रुपये से अधिक की स्क्रैप बिक्री दर्ज करने वाला जोन बना।
  • यह इस वर्ष भारतीय रेलवे का एकमात्र जोन है जिसने 700 करोड़ रुपये से अधिक की स्क्रैप बिक्री की है।
  • उत्तर रेलवे ने चार वर्षों से लगातार भारतीय रेलवे के सभी मण्डल रेलवे और उत्पादन इकाइयों में पहला स्थान हासिल किया है।

निष्कर्ष

उत्तर रेलवे की यह ऐतिहासिक उपलब्धि सिर्फ राजस्व वृद्धि नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा और रेलवे की सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग है। स्क्रैप निपटान अब एक आर्थिक और संरचनात्मक सुधार का माध्यम बन चुका है।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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