कर्मचारीगण गृह निर्माण संस्था में बिगड़ा उपायुक्त का खेल, आईडीए ने संयुक्त आयुक्त को वापस की वरीयता सूची, कहा-आपकी अनुशंसा नहीं है

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इंदौर। कर्मचारीगण गृह निर्माण संस्था की वरीयता सूची में सहकारिता उपायुक्त और पूर्व उप अंकेक्षक आनंद पाठक का खेल बिगड़ गया है। आईडीए ने यह सूची संयुक्त आयुक्त को वापस कर दी है। आईडीए ने कहा है कि यह सूची सहकारिता उपायुक्त ने भेजी है और इसमें संयुक्त आयुक्त की अनुशंसा नहीं है। इसलिए आप अनुशंसा कर फिर से सूची भेजें।

आईडीए ने संयुक्त आयुक्त को लिखे पत्र में कहा है कि हाईकोर्ट इन्दौर द्वारा योजना कमांक 114 भाग-2 में कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित इन्दौर को प्राप्त होने वाले 81 भूखण्डों के विरूद्ध 72 पात्र भूखण्डधारी संस्था सदस्यों की वरीयता सूची भेजी गई है। इस वरीयता सूची में आपके द्वारा अनुशंसा नहीं की गई है, केवल उपायुक्त, सहकारिता की सूची को मूलतः प्रेषित किया गया है। उक्त वरियता सूची को आप अपनी अनुशंसा सहित फिर से भेजें।

डीआर ने अपने स्तर पर फाइनल कर दी सूची

उल्लेखनीय है कि उपायुक्त ने वर्षों से विवादित कर्मचारीगण गृह निर्माण संस्था की वरीयता सूची अपने स्तर पर फाइनल कर हाईकोर्ट में लगा दी। यह सूची हाईकोर्ट ने आईडीए को भेज दी। इसको लेकर सहकारिता आयुक्त से डीआर को शिकायत की गई है। डीआर ने सूची फाइनल कर कोर्ट को तो दे दी, लेकिन यह नहीं बताया कि इसको लेकर कितने केस पेंडिंग है। उपायुक्त ने ईओडब्ल्यू की जांच तक को छुपा लिया।

पैसों के दम पर चल रहा था पूरा खेल

सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड पूर्व उप अकेक्षक आनंद पाठक है। उसने वरीयता सूची के लिए पूर्व डीआर को 40 लाख रुपए दिए थे। अब वर्तमान सहकारिता निरीक्षक संजय कूचनकर को 20 लाख रुपए दिए हैं। संजय कूचनकर ने पुराने डीआर की बनाई सूची में छेड़छाड़ नहीं करने के एवज में वर्तमान डीआर को 12 लाख रुपए दिए। कूचनकर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बेटी आयुषी कूचनकर के नाम से प्लॉट भी लिया था, जिसकी शिकायत हुई थी। आनंद पाठक संस्था के सभी सदस्यों से 20 लाख रुपए प्रति प्लॉट की वसूली कर रहा है, जिसकी बंदरबांट भी हो रही है।

ईओडब्ल्यू पहले से ही कर रहा जांच

इस मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई (ईओडब्ल्यू) में प्रकरण पंजीबद्ध है। ईओडब्ल्यू ने 23 सितंबर 25 को ही सुरेंद्र जैन सहकारी निरीक्षक इंदौर, एनके राठौर सेवानृवित्त वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक इंदौर, बीएल मकवाना, संयुक्त आयुक्त सहकारिता, इंदौर, राधेश्याम गरोठिया सहकारी निरीक्षक इंदौर सहित संस्था के सदस्यों को नोटिस जारी किया था। ईओडब्ल्यू ने आईडीए सीईओ को इस संबंध में 21 नवंबर को एक पत्र भेजकर इस केस की पूरी जानकारी मांगी थी।

पैसे की बंदरबांट में जेआर को भी आ गया लालच

सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड पूर्व उप अकेक्षक आनंद पाठक है। उसने वरीयता सूची के लिए पूर्व डीआर को 40 लाख रुपए दिए थे। अब वर्तमान सहकारिता निरीक्षक संजय कूचनकर को 20 लाख रुपए दिए हैं। संजय कूचनकर ने पुराने डीआर की बनाई सूची में छेड़छाड़ नहीं करने के एवज में वर्तमान डीआर को 12 लाख रुपए दिए। कूचनकर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बेटी आयुषी कूचनकर के नाम से प्लॉट भी लिया था, जिसकी शिकायत हुई थी। आनंद पाठक संस्था के सभी सदस्यों से 20 लाख रुपए प्रति प्लॉट की वसूली कर रहा है, जिसकी बंदरबांट भी हो रही है। सूत्र बताते हैं कि पैसों की बंदरबांट देख जेआर को भी लालच आ गया। कहा तो यह भी जा रहा है कि वे भी प्रति प्लॉट एक-एक लाख रुपए की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि इस खेल का अंजाम क्या होता है?

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