देवी अहिल्या संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने किया जारी

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इंदौर। देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। महालक्ष्मी नगर और अयोध्यापुरी कॉलोनी में बारी गड़बड़ियों के कारण सहकारिता विभाग ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। इसके खिलाफ वे हाईकोर्ट से स्टे तो ले आए, लेकिन अब जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग-1 ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अजमेरा को 19 नवंबर को आयोग के समक्ष पेश होना है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार संस्था की सदस्य सविता दांगी ने 2011 में आयोग के समक्ष एक परिवाद प्रस्तुत किया था। इसमें कहा गया था कि संस्था में पैसे जमा करने के बाद भी श्रीमहालक्ष्मी नगर के प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं की गई थी। आयोग ने मार्च 2024 में संस्था को रजिस्ट्री करने का आदेश दिया था, लेकिन अजमेरा ने रजिस्ट्री नहीं की। इस पर अब आयोग ने गिरफ्तार वारंट जारी कर दिया है।

सुनवाई के दौरान संस्था के वकील ने लिखित जवाब में बताया कि संस्था का वर्तमान संचालक मंडल 2021 में निर्वाचित हुआ था। इसके बाद से सदस्यों को प्लॉट दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। संस्था द्वारा भेजी वरीयता सूची प्रशासन ने अमान्य कर दी थी। इसके साथ ही संस्था की तरफ से कहा गया कि सदस्य ने विकास और अन्य शुल्क जमा नहीं किए हैं, इसलिए रजिस्ट्री नहीं की गई। परिवादी की ओर से बताया गया कि उन्हें संस्था ने बकाया राशि का कोई पत्र जारी नहीं किया है। यदि संस्था बकाया राशि की जानकारी देती है तो वे उसे जमा कराने को तैयार है। आयोग ने आदेश में लिखा है कि पर्याप्त समय होने के बाद भी संस्था ने बकाया के लिए कोई पत्र जारी नहीं किया। इस पर संस्था अध्यक्ष के खिलाफ आयोग ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

निष्कासन पर हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे अजमेरा

उल्लेखनीय है कि वर्षों से संस्था का ऑडिट नहीं कराने और अन्य अनियमितताओं के कारण सहायक रजिस्ट्रार (अंके.) सहकारी संस्थाएं एपीएस बिलोदिया ने 22 सितंबर को अजमेरा को निष्कासित कर दिया था। निष्कासन आदेश में विभाग द्वारा भेजे नोटिसों का हवाला देते हुए अजमेरा द्वारा की गई गड़बड़ियों का भी जिक्र किया है। इसमें साफ लिखा है कि अजमेरा ने विभाग के बारबार लिखने के बाद भी संस्था का अधूरा हिसाबकिताब दिया। यहां तक कि अंकेक्षकों भी डाक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराए। इतना ही नहीं विभाग के पत्रों का संतोषजनकर उत्तर भी नहीं दिया। इस आदेश के खिलाफ अजमेरा ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि जब आपके निचली अदालतों में समाधान का विकल्प है तो आप वहीं जाएं। हाईकोर्ट ने अजमेरा को तत्काल राहत देते हुए सहकारिता विभाग के आदेश पर स्टे देते हुए 15 दिन में निचली अदालत में अपील करने को कहा था। चूंकि निष्कासन आदेश एआर ऑडिट ने दिया था, तो अजमेरा के पास जेआर ऑडिट की कोर्ट में जाने का विकल्प था।

तीन वर्ष के लिए हुआ था निष्कासन

सहकारिता विभाग ने अपने आदेश में लिखा था कि सतत् रूप से वैधानिक जारी नोटिसों के चूककर्ता के रूप में पाते हुए धारा 56 (3) के तहत देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था मर्या, इन्दौर के अध्यक्ष विमल अजमेरा को संचालक पद से 03 वर्ष के लिए निर्रहित घोषित किया जाता है। संचालक के पद से हटने के साथ ही इन्हें अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया है। अब देखना यह है कि सहकारिता विभाग अजमेरा को लेकर क्या फैसला लेता है?

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