‘एमपीसीए’ के पीछे ‘बीसीसीआई’: क्या अब इंदौर से ग्वालियर जा रहा है क्रिकेट, भाजपा संगठन को भी नहीं दिया भाव, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह की उपस्थिति ने उठाए कई सवाल

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इंदौर। रविवार को इंदौर के होलकर स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैंड मैच सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। मैच में भारत की हार के साथ ही इंदौर की हार भी होती दिखी। टिकटों और पास की व्यवस्था ने यह बता दिया कि ‘आप हमारे हैं कौन।‘ खास बात यह कि इस बार नई व्यवस्था ने जहां क्रिकेट प्रेमियों को निराश किया, वहीं एमपीसीए के पदाधिकारी भी असहाय नजर आए। भागीरथपुरा की घटना के बाद इंदौर के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने मैच से किनारा किया, लेकिन भाजपा के प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह की उपस्थिति ने कई सवाल खड़े किए।

हालांकि जब भी इंदौर में मैच होता है, क्रिकेट प्रेमी परेशान होते हैं, लेकिन इस बार कुछ ज्यादा ही दिक्कत हुई। ऑनलाइन टिकट लेने की आस में बैठे लोगों को उस समय निराशा हुई जब साइट और एप दोनों क्रैश हो गए। इसके बाद लोग ज्यादा पैसे खर्च कर भी टिकट के जुगाड़ में लगे, लेकिन सफल नहीं हो पाए। कल क्रिकेट प्रेमी तो ब्लैक में टिकट खरीदने के चक्कर में ठगी का शिकार भी हुए। एमपीसीए के पदाधिकारी भी इसलिए मदद नहीं कर पाए, क्योंकि इस बार टिकटों का एक बड़ा हिस्सा ग्वालियर के खाते में चला गया था। इसके साथ ही पास वितरण की व्यवस्था भी इतनी गड़बड़ रही कि नगर निगम जैसे महत्वपूर्ण विभाग को तो एक तरह से मैच का बायकाट ही करना पड़ा।

महाकाल मंदिर में ‘एमपीसीए’ से पीछे ‘बीसीसीआई’

कल का मैच देखने के लिए बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास भी इंदौर आए थे। वे एमपीसीए के अध्यक्ष और ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुत्र महाआर्यमन सिंधिया के साथ महाकाल का दर्शन करने उज्जैन गए। प्रोटोकॉल के हिसाब से महाआर्यमन को मन्हास से पीछे होना चाहिए, लेकिन महाकाल मंदिर में मन्हास, महाआर्यमन के पीछे बैठे नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर भी कई कहानियों को जन्म देती है। इतना ही नहीं एमपीसीए की मनमानी से बीसीसीआई अध्यक्ष भी हैरान हैं। पहली बार बीसीसीआई के पास शिकायतों के ढेर सारे मेल भी पहुंचे हैं। अब देखना यह होगा कि भविष्य में बीसीसीआई का रिएक्शन क्या होता है।

प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह की उपस्थिति ने चौंकाया

हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों के बाद पूरे देश में प्रदेश सरकार की बदनामी हुई है। भाजपा के नेता इस मुद्दे पर चारों तरफ से घिरे हुए हैं। मैच से एक दिन पहले ही राहुल गांधी भी इंदौर आए थे। ऐसे में भाजपा नेता ऐसे आयोजन से कन्नी काटते नजर आ रहे हैं। संगठन ने भी फिलहाल चुप रहने को कहा है। कल के मैच में भले ही सबसे ज्यादा पास मंत्री गुट के पास गए हों, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित कई नेता नजर नहीं आए। यहां तक कि हर मैच में अपनी उस्थिति दर्ज कराने वाले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी नहीं आए, लेकिन भाजपा के प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह की उपस्थिति ने लोगों को चौंकाया।

पुलिस ने तो मांगे नहीं, नगर निगम को दिया नहीं

इस बार के मैच में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था तो दुरुस्त रही, लेकिन पास के मामले में वह पीछे रही। इसका कारण पुलिस आयुक्त संतोष सिंह हैं। उन्होंने पहले ही कह दिया था कि उनको पास नहीं चाहिए, लेकिन पुलिस वेयलफेयर फंड में पैसा चाहिए। इसका नतीजा यह भी रहा कि इस बार पुलिस वेलफेयर फंड में सबसे ज्यादा पैसा मिला है। आयुक्त की सख्ती के कारण ही पुलिस जहां स्टेडियम के अंदर और बाहर चुस्त रही, लेकिन किसी अधिकारी ने पास मांगने की हिम्मत नहीं की। इतना ही नहीं अक्सर पुलिस अधिकारी परिचितों को स्टेडियम में घुसाते नजर आते हैं, लेकिन कल पुलिस आयुक्त की सक्रियता की वजह से यह भी नहीं हो पाया। नगर निगम के अधिकारियों को इस बार बिल्कुल ही तवज्जो नहीं दी गई, इस कारण एक तरह से उन्होंने मैच का बहिष्कार ही किया।

सुमित मिश्रा ने वापस कर दिए टिकट

सूत्र बताते हैं कि एमपीसीए के अध्यक्ष महाआर्यमन की व्यवस्था में उनके पिता के खास मंत्री तुलसी सिलावट को 1700 दिए गए थे। विधायकों और सांसद को 60-60 टिकट मिले थे। महापौर को 30 और सभी पार्षदों को दो-दो टिकट मिले। इसके बाद सबसे ज्यादा 500 टिकट आईडीसीए के चेयरमैन होने के नाते आकाश विजयवर्गीय के पास थे, लेकिन इस पूरे मामले में भाजपा के नगर संगठन को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया। नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को 4 टिकट भेजे गए थे, जो उन्होंने वापस कर दिए। मिश्रा ने एक चिट्‌ठी लिखकर 200 टिकट मय पैसे की मांग की। उन्हें नगर के पदाधिकारियों और वार्ड अध्यक्षों को देने थे, लेकिन सफलता नहीं मिली।

जिला अध्यक्ष चावड़ा मैच में सक्रिय नजर आए

जहां नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा इस मैच से गायब रहे, वहीं जिला अध्यक्ष श्रवण चावड़ा सक्रिय नजर आए। उनसे किसी ने भागीरथपुरा को लेकर सवाल किए तो उन्होंने कहा कि यह तो शहर का मामला है, मैं तो ग्रामीण क्षेत्र का अध्यक्ष हूं।

इंडेक्स के भदौरिया के साथ नजर आए अक्षत चौधरी

खुद को युवा मोर्चा का अध्यक्ष मान चुके अक्षत चौधरी कल अपनी झांकी दिखाते नजर आए। इन दिनों अक्षत भाजपा के धन्नासेठ के रूप में चर्चित हैं। इसी दम पर उन्हें भरोसा है कि उन्हें भाजयुमो का अध्यक्ष बना दिया जाएगा। खास बात यह कि वे इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के सुरेश भदौरिया के साथ बैठे थे। यह वही भदौरिया हैं, जिन्हें मेडिकल कॉलेजों को फर्जी मान्यता दिलाने सहित कई मामलों में सीबीआई, आयकर विभाग, ईडी आदि तलाशती रहती हैं। भदौरिया भाजपा के सहारे अब अपने पाप धोने की कोशिश में लगे हैं। इसी रणनीति के तहत उन्होंने अपने कॉलेज की कर्मचारी डॉ.दीप्ति हाड़ा को संगठन में उपाध्यक्ष बनवा दिया। सूत्र बताते हैं कि यह पूरा खेल पैसों के दम पर हुआ है और हाड़ा खुद को प्रदेश अध्यक्ष से कम नहीं समझती हैं।

क्या अब सुमित मिश्रा करेंगे प्रोटोकॉल का पालन

इस मैच में सिंधिया ने भाजपा के नगर संगठन को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया जब से भाजपा में आए हैं, प्रोटोकॉल के तहत नगर के पदाधिकारी भी एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने जाते हैं। अब देखना होगा कि क्या सुमित मिश्रा अपने संगठन की अनदेखी के बाद भी प्रोटोकॉल फॉलो करते हैं या फिर सिर्फ तुलसी सिलावट जैसे सिंधिया के खास नेता उनका स्वागत करने जाएंगे।

मीडिया की व्यवस्था इस बार भी रही चुस्त

हर बार की तरह मैच में मीडिया की व्यवस्था भी काफी चुस्त रही। इस व्यवस्था को संभाल रहे राजीव रिसोड़कर ने पूरी सख्ती दिखाई और किसी भी फर्जी कार्डधारी को घुसने नहीं दिया। इसके कारण मीडिया के सही लोग ही मैदान में नजर आए।

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