मध्यप्रदेश के श्री आनंदपुर धाम पहुंचे पीएम मोदी, मंदिरों में किए दर्शन, बोले-अद्वैत के विचारों में सारी चिंताओं का समाधान

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अशोकनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को मध्यप्रदेश अशोकनगर के ईसागढ़ स्थित श्री आनंदपुर धाम पहुंचे। यहां उन्होंने मंदिरों में दर्शन किए और सत्संग में शामिल हुए। पीएम ने कहा कि आनंदपुर धाम में आकर मन अभिभूत है। हृदय आनंद से भर गया। जिस भूमि का कण-कण संतों की तपस्या से सींचा गया हो, जहां परमार्थ परंपरा बन गया हो। वो धरती साधारण नहीं है। हमारे संतों ने अशोकनगर के बारे में कहा था कि यहां शोक आने से डरता है।

पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में भौतिक उन्नति के बीच मानवता के लिए युद्ध, संघर्ष और मानवीय मूल्यों से जुड़ी कई चिंताएं हमारे सामने हैं। इनकी जड़ में क्या है। इनकी जड़ में अपने और पराए की मानसिकता है। ये मानसिकता मानव से मानव को दूर करती है। आज विश्व भी सोच रहा है इनका समाधान कहां मिलेगा। इनका समाधान अद्वैत के विचार में मिलेगा। अद्वैत यानी यहां कोई द्वैत नहीं है।

मानवता की सेवा में आगे आनंदपुर धाम

मोदी ने आगे कहा कि आज दुनिया में भौतिक उन्नति के बीच मानवता, संघर्ष से भरी कई चिंता भी मौजूद है। वो मानसिकता जो मानव को मानव से दूर करती है। आज विश्व भी समाधान खोज रहा है कि इनका समाधन कहा मिलेगा, इनका समाधान अद्वैत के विचारों में मिलेगा। अद्वैत यानी एक ही ईश्वर को देखने का विचार। इससे आगे सृष्टि को संपूर्ण देखने की सोच ही अद्वैत है। इसी अद्वैत सिद्धांत को परम दयाल महाराज सरल शब्दों में कहते थे सो तू है तो मैं हूं। यह विचार मेरे और तुम्हारे का भेद खत्म कर देता है। और विचार सब मान ले तो सारे झगड़े ही खत्म हो जाएं।

सेवा की भावना सरकार के हर प्रयास में

अभी कुछ देर पहले ही छठे पादशाही महाराज से चर्चा हो रही थी। वे मुझे आनंद धाम के बारे में बता रहे थे। यहां के पांच काम बता रहे थे। सेवा की इसी संस्कृति को आनंदपुर ट्रस्ट आगे बढ़ा रहा है। यहां इलाज होता है, मुफ्त शिविर लगाए जाते हैं। आधुनिक गौशाला भी चलाई जाती है। स्कूल भी चलाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं आनंदपुर धाम पर्यावरण के क्षेत्र में मानवता की सेवा कर रहा है। यहां के अनुयायियों ने हजारों एकड़ बंजर जमीन को हरा-भरा बनाया है। यह पेड़ परमार्थ के काम आ रहे हैं। सेवा की यही भावना आज हमारी सरकार के हर प्रयास के केंद्र में है। हर जरूरतमंद प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में खाने की चिंता से मुक्त है। आज हर गरीब पीएम आवास योजना में लाभांवित हो रहा है। मुफ्त इलाज हो रहा है। गरीब बच्चों के सपने साकार हो रहे हैं।

एमपी पहले से ही अजब है और गजब है

मोदी ने आगे कहा कि अशोकनगर और आनंदपुर धाम जैसे क्षेत्र जिन्होंने देश को इतना कुछ दिया है। यहां विकास की असीम संभावना है। हम एमपी और अशोक नगर को तेजी से बढ़ा रहे हैं। चंदेरी साड़ी को आगे बढ़ाने के लिए जीआई टैग दिया गया है। कुछ ही दिन पहले रामनवमी का महापर्व था, हम देश में राम वन गमन पथ का विकास कर रहे हैं। इसका एक अहम हिस्सा मध्यप्रदेश से गुजर रहा है। और हमारा एमपी तो पहले से ही अजब और गजब है।

जय सच्चिदानंद का लगाया जयकारा

पीएम मोदी ने जय सच्चिादानंद के जयकारा भी लगाया। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि यहां बैसाखी और गुरु महाराज के अवतरण दिवस पर शामिल होने का सौभाग्य मिला है। मैं इस पवित्र अवसर पर प्रथम पादशाही अद्वैत आनंदजी महाराज सहित सभी संतों को प्रणाम करता हूं। मुझे जानकारी मिली है कि आज ही के दिन 1936 में द्वितीय पादशाही को महासमाधि दी गई थी। आज के ही दिन 1964 में तृतीय पादशाही निज स्वरूप में लीन हुए थे। मैं दोनों को श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं। मैं मा जागेश्वरी देवी, मां बिजासन, मां जानकी करीला माता धाम को भी प्रणाम करता हूं।

अद्वैत मंदिरों में किए दर्शन

इससे पहले पीएम मोदी ने परमहंस अद्वैत मत के मंदिरों में दर्शन किए। प्रमुख गुरू से भेंट की। वे सत्संग कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। पीएम मोदी के साथ सीएम डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा मौजूद हैं।

1930 में हुई थी श्री आनंदपुर धाम की स्थापना

कहा जाता है कि जब परमहंस दयाल जी महाराज (प्रथम पादशाही) आगरा में सत्संग दे रहे थे, तब ईसागढ़ निवासी सेठ पन्नालाल मोदी ने उनसे गांव आने का निवेदन किया। बाद में, द्वितीय पादशाही श्री परमहंस स्वरूप आनंद जी महाराज ने सन् 1929 में ग्वालियर राज्य में पदार्पण किया और ईसागढ़ क्षेत्र को परमार्थ का उपयुक्त स्थल माना। सन् 1930 में भक्तों ने कठिन परिश्रम से उबड़-खाबड़ भूमि को हरे-भरे उद्यान में परिवर्तित किया और यहीं पर श्री आनंदपुर धाम की स्थापना हुई, जिसने क्षेत्रीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को नया स्वरूप दिया। आनंदपुर धाम की स्थापना आध्यात्मिक और परोपकारी उद्देश्यों के लिए की गई है। 315 हेक्टेयर में फैले इस क्षेत्र में 500 से अधिक गायों के साथ एक आधुनिक गौशाला है और श्री आनंदपुर ट्रस्ट परिसर के अंतर्गत कृषि गतिविधियां संचालित की जाती हैं।

Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)
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