अब यह कौन कह रहा है कि सराफा चौपाटी का विवाद भोपाल में सुलझेगा, अगर यह सही है तो अन्य मामलों में इंदौर की बदहाली भोपाल को क्यों नहीं दिखती?

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इंदौर। सराफा चौपाटी हटाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर यह खबरें चलाई जा रही हैं कि अब इस मामले का समाधान भोपाल से होगा। अगर ये खबरें सही हैं तो बदहाल इंदौर के अन्य मामलों की सुनवाई भोपाल में क्यों नहीं हो रही? क्यों भाजपा शासन और संगठन ने इंदौर को एक थोपे हुए महापौर के भरोसे छोड़ दिया है?

उल्लेखनीय है कि सराफा चौपाटी को लेकर महापौर द्वारा बनाई कमेटी ने भी इसे हटाने की सिफारिश की थी। खुद कई बार महापौर भी विभिन्न अवसरों पर खतरे की आशंका जता चुके हैं। खासकर हरदा हादसे के बाद ही इसे हटाने की मांग ने जोर पकड़ा था और लगभग हर पक्ष इस बात पर सहमत था कि सराफा चौपाटी खतरे से खाली नहीं है। अब जबकि व्यापारी और रहवासी लगातार विरोध कर रहे हैं, इसके बाद भी महापौर पुष्यमित्र भार्गव मनमानी पर उतर गए हैं। विवाद बढ़ता देख सोशल मीडिया पर अब ऐसी खबरें चलाई जा रही हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि इस मामले का समाधान भोपाल से होगा।

अन्य मामलों में क्या भोपाल सो रहा है

इंदौर शहर की बदहाल हालत किसी से छुपी नहीं है। पूरे शहर की सड़कें खुदी पड़ी हैं। हल्की सी बारिश में ही सड़कों और गलियां लबालब हो जा रही हैं। हर साल बरसात में नाला सफाई के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च होते थे, लेकिन इस बार पता नहीं क्या हुआ? निगम ने इसका हो-हल्ला भी नहीं मचाया। जलजमाव काफी ज्यादा हो रहा है। कल की बारिश में ही सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो में सिद्धार्थ नगर, गांधी नगर की गलियों में दोपहिया वाहन पानी में बहते दिखाए गए थे। जनता कोसती रहती है, लेकिन निगम सोता रहता है। ताज्जुब तो तब होता कि प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले इंदौर की बदहाली पर भी भोपाल सोता रहता है।

काम नहीं होने से विधायक भी हैं नाराज

महापौर की हठधर्मिता ऐसी है कि काम नहीं होने से कई विधायक भी नाराज हैं। विधानसभा तीन के विधायक गोलू शुक्ला 9 करोड़ रुपए के मच्छी बाजार वाले प्रोजेक्ट के पास होने का इंतजार कर रहे हैं। विधानसभा दो के विधायक रमेश मेंदोला 15 करोड़ रुपए के स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स प्रोजेक्ट मंजूर नहीं होने पर नाराज चल रहे हैं। यही हाल कई अन्य विधायकों का है। पार्षद भी काम नहीं होने से परेशान हैं, लेकिन महापौर अपनी ही मस्ती में मस्त हैं। उन्हें दिल्ली जाकर पीआर एक्सरसाइज से ही फुर्सत नहीं मिल रही।

सराफा का मामला चार नंबर पर थोपने की कोशिश

भाजपा में इस बात की भी चर्चा है कि सराफा चौपाटी का मामला बिगड़ता देख अब इसे चार नंबर वालों पर थोपने की तैयारी है। दबी जुबान से यह भी कहा जा रहा है कि यह उनका ही मामला है। जबकि, चार नंबर वालों का इस मामले से कोई लेनादेना नहीं। कमेटी महापौर ने बनाई, बैठकें नगर निगम ने की, निरीक्षण नगर निगम ने किया, ऐसे में चार नंबर को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश भाजपा के ही कई पार्षदों व नेताओं को आश्चर्य में डाल रही है।

रीजनल पार्क के टेंडर में भी हठधर्मिता

भाजपा में इन दिनों महापौर की हठधर्मिता के खूब चर्चे हैं। महापौर परिषद के कुछ सदस्यों और अधिकारियों के विरोध के बाद भी रीजनल पार्क का टेंडर इंदौर के सबसे विवादास्पद लोगों को देने का मामला इनमें से एक है। पूरे शहर को पता है कि पिंटू छाबड़ा और राजेश मेहता क्या करते हैं? छाबड़ा की तो हर बिल्डिंग ही विवादित है, इसके बाद भी महापौर उनकी कंपनी को ही टेंडर देने की जिद कर बैठे हैं। भाजपा के नेता ही सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इसमें महापौर का क्या हित है? शहर का हित तो दिख नहीं रहा।

सफाई में भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहता इंदौर

पूरे शहर और नगर निगम को पता है कि इंदौर आठवीं बार सफाई में नंबर वन कैसे आया? सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई थी। पार्षद तक अपने वार्ड में गंदगी की शिकायत करते थे, तब भोपाल से एक अधिकारी को बुलना पड़ा। निगमायुक्त ने पूरी ताकत लगा दी। तब जाकर इंदौर दिल्ली में मुंह दिखाने के काबिल रहा और जब तमगा मिल गया तो कॉलर ऊंचा करके फोटो खिंचवाते कोई और घूम रहा था।

ट्रैफिक सुधार में हर बार मुंह की खाई

महापौर ने जब कार्यभार संभाला था तो इंदौर की ट्रैफिक को लेकर चिन्ता जाहिर की थी। इसके बाद यह कहा गया कि इंदौर को ट्रैफिक में भी नंबर वन बनाएंगे। कई प्रयोग किए गए। जवाहर मार्ग को वन वे करने से लेकर राजवाड़ा पर ई-रिक्शा प्रतिबंध तक सारे प्रयोग दो-चार दिन बाद ही दम तोड़ गए। ट्रैफिक सुधार में महापौर ने ऐसी मुंह की खाई कि अब तो नाम भी नहीं लेते।

दिल्ली से दो बार मिल चुकी है फटकार

शायद यह पहली ही अवसर होगा कि इंदौर के किसी महापौर को दिल्ली से फटकार मिली हो। सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार की कई योजनाओं जिनमें प्रधानमंत्री रोजगार योजना भी शामिल है के बारे में दिल्ली में काफी शिकायतें पहुंची थीं। बताया जाता है कि इसको लेकर महापौर को दिल्ली में दो बार फटकार लगाई जा चुकी है, लेकिन उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वे महापौर कार्यकाल खत्म होने के बाद चार नंबर विधानसभा से दावेदारी की तैयारी में जुटे हुए हैं।

आलोचना या मजाक बर्दाश्त नहीं

अपने महापौर को कोई आईना भी नहीं दिखा सकता, क्योंकि आलोचना उन्हें बिल्कुल ही बर्दाश्त नहीं। मीडिया की खबरों पर भी वे विफर पड़ते हैं। मजाक पर भी वे गंभीर हो जाते हैं। हाल ही में जब भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने मजाक में कुछ कह दिया था तो महापौर जी नाराज हो गए थे। बताया जाता है कि उन्होंने मिश्रा की शिकायत भोपाल तक पहुंचा दी थी।

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