नोएडा में हुए हिंसक बवाल को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। मजदूरों के वेतन वृद्धि से जुड़ा यह प्रदर्शन सिर्फ स्थानीय नहीं था, बल्कि इसकी चिंगारी दूर बैठे लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए भड़काई थी। जांच में सामने आया है कि तेलंगाना और कर्नाटक से कुछ लोग व्हाट्सएप और टेलीग्राम समूहों के जरिए आंदोलन को दिशा दे रहे थे।
एसटीएफ की जांच में पता चला है कि कई टेलीग्राम समूह खास तौर पर श्रमिकों को उकसाने के लिए बनाए गए थे। इन समूहों में नोएडा में काम करने वाले बड़ी संख्या में मजदूरों को जोड़ा गया था और उन्हें लगातार निर्देश दिए जा रहे थे। डिजिटल ट्रेल से यह भी स्पष्ट हुआ है कि बाहरी राज्यों से इन गतिविधियों को संचालित किया जा रहा था।
हिंसा के दौरान बनाए गए 500 से अधिक वीडियो अब जांच के घेरे में हैं। हजारों वीडियो में से सैकड़ों सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें कई संदिग्ध चेहरे नजर आ रहे हैं। एसटीएफ खासतौर पर उन वीडियो की पड़ताल कर रही है, जिनमें पुलिस को निशाना बनाया गया या उपद्रव फैलाते लोग दिख रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोग ऐसे भी थे, जो किसी फैक्टरी या कंपनी से जुड़े नहीं थे, फिर भी हिंसा में शामिल थे।
सोमवार को हुए इस हिंसक प्रदर्शन के बाद बुधवार रात तक करीब 600 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार, “मजदूर बिगुल दस्ता” से जुड़े लोग फैक्टरी क्षेत्रों में घूम-घूमकर श्रमिकों को भड़का रहे थे। इसी संगठन पर पहले मानेसर में भी हिंसा भड़काने का आरोप लग चुका है।
वहीं, सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो साझा करने के मामले में राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ साइबर अपराध थाने में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि दोनों ने पुराने और दूसरे स्थान के वीडियो को नोएडा का बताकर साझा किया, जिससे स्थिति और भड़क गई।


