सौरभ शर्मा की जमानत पर कांग्रेस का तंज, मुकेश नायक ने कहा-भंग कर देना चाहिए लोकायुक्त संगठन

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भोपाल। आरटीओ के पूर्व सिपाही सौरभ शर्मा को मंगलवार को लोकायुक्त वाले मामले में जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने 60 दिन बाद भी चालान नहीं पेश करने पर आपत्ति भी उठाई थी। इसके बाद बुधवार को कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि लोकायुक्त जैसी संस्था आज पहरेदार नहीं बल्कि भ्रष्टाचार में भागीदार हो गई है। लोकायुक्त को भंग कर देना चाहिए।

मुकेश नायक ने कहा कि सौरभ शर्मा की जमानत लोकायुक्त, मध्य प्रदेश की पुलिस और सरकार के साथ जितनी भी जांच एजेंसियां हैं उनके लिए काला धब्बा है। इतिहास में उनकी बेईमानी और निर्लज्जता को याद किया जाएगा। लोकायुक्त ने 60 दिन तक चालान पेश नहीं किया और यह सिद्ध कर दिया कि लोकायुक्त पहरेदार नहीं बल्कि हिस्सेदार है। मुकेश नायक ने कहा 11 करोड़ रुपया और 52 किलो सोना सड़कों पर पड़ा मिल रहा है। 22 साल से मध्य प्रदेश में काम कर रही यह सरकार इतनी भी सक्षम नहीं है कि वो यह बता सके कि यह सोना किसका है? मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की कार्य प्रणाली की जितनी भी आलोचना की जाए कम है।

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576 मामले लोकायुक्त ने ठंडे बस्ते में डाले

नायक ने कहा कि मध्य प्रदेश में आर्थिक अपराधों के 576 ऐसे मामले हैं जिनमें लोकायुक्त ने जांच की और उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया। इन मामलों में सरकार ने केस चलाने की अनुमति ही नहीं दी। सौरभ शर्मा की जमानत ने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया। एक तरफ विपक्षी पार्टियों के नेता यहां तक कि मुख्यमंत्री की जमानतों के लाले पड़ जाते हैं। दिल्ली के एक मंत्री की 2 साल तक जमानत नहीं हुई। उपमुख्यमंत्री की 6 महीने तक जमानत नहीं हुई। और सौरभ शर्मा एक सिपाही की 60 दिन में जमानत हो जाती है। जो रंगे हाथों पकड़ा गया था। मध्य प्रदेश के इतिहास में आज तक ऐसी सरकार नहीं बनी। जैसी वर्तमान में चल रही है जो इतनी निर्भीकता, निर्लज्जता से खुलेआम भ्रष्टाचार कर रही है।

60 दिन तक क्यों पेश नहीं हुआ चालान

मुकेश नायक ने कहा कि मैं मध्य प्रदेश की सरकार से यह पूछना चाहता हूं 60 दिन तक चालान पेश करने का क्या कारण है? ऐसी क्या मजबूरी थी कि 60 दिन तक आपने चालान पेश नहीं किया और इतने बड़े आर्थिक अपराधी की जमानत हो गई? बारबार लोकायुक्त की नाकामी के बाद हम ऐसी संस्था जो पहरेदार होकर हिस्सेदारी हो गई है। उसे हम क्यों ढ़ोना चाहते हैं? मैं पक्ष और विपक्ष, प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश के राज्यपाल से अपील करना चाहता हूं कि ऐसी संस्था का क्या औचित्य है जो पहरेदार नहीं, हिस्सेदार है। ऐसी संस्था को भंग कर देना चाहिए। ऐसी संस्था भ्रष्टाचार को रोकने के बजाय उसको प्रमोट कर रही है। और उसमें शामिल हो रही है।

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