पुष्प विहार कॉलोनी विवाद में 20 सदस्यों को तगड़ा झटका, सिविल कोर्ट ने दावा किया खारिज, साबित नहीं कर पाए अपना स्वामित्व

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इंदौर। वर्षों से विवादों में घिरे पुष्प विहार कॉलोनी भूमि मामले में 20 दावेदारों को बड़ा कानूनी झटका लगा है। इंदौर के दशम जिला न्यायाधीश ने करीब 68.898 एकड़ भूमि से जुड़े सिविल वाद को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कर दिया कि वादी न तो अपने स्वामित्व को अदालत में साबित कर सके और न ही उस बिक्री विलेख को अवैध घोषित कराने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार प्रस्तुत कर पाए, जिसे उन्होंने चुनौती दी थी।

नसीम हैदर का है मामला

वादियों ने दावा किया था कि वे मजदूर पंचायत गृह निर्माण सहकारी संस्था के सदस्य हैं और संस्था ने उन्हें प्लॉट आवंटित किए थे। उनका आरोप था कि वर्ष 2006 में संस्था के कथित प्रबंधक नसीम हैदर ने अधिकार न होने के बावजूद विवादित भूमि के बिक्री विलेख निष्पादित कर दिए। उन्होंने अदालत से 3 मई 2006 के बिक्री विलेख को शून्य घोषित करने, स्वयं को भूमि का वैध स्वामी घोषित करने और स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की थी।

फर्जी बिक्री को लेकर पहले केस

सुनवाई के दौरान वादियों ने यह भी बताया कि कथित फर्जी बिक्री को लेकर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ा आपराधिक प्रकरण पहले से लंबित है। वहीं रिकॉर्ड में यह तथ्य भी सामने आया कि वर्तमान संस्था अध्यक्ष ने अपने जवाब में कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार नसीम हैदर संस्था का अधिकृत प्रबंधक नहीं था।इसके बावजूद अदालत ने कहा कि केवल आरोप पर्याप्त नहीं हैं। न्यायालय के अनुसार वादी यह साबित नहीं कर सके कि विवादित भूमि का विधिवत आवंटन उनके पक्ष में हुआ था या उनके स्वामित्व को सिद्ध करने वाले आवश्यक दस्तावेज विधिक रूप से प्रमाणित हैं। अदालत ने यह भी पाया कि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, जिनके आधार पर स्वामित्व का दावा किया गया, वे या तो प्रस्तुत नहीं किए गए या विधिवत प्रमाणित नहीं थे।

कोर्ट ने सहकारिता विभाग का दिया हवाला

निर्णय का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि अदालत ने मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 64 और 82 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सहकारी संस्था के गठन, प्रबंधन, सदस्यों के अधिकार और संस्था के आंतरिक विवादों का निपटारा सिविल कोर्ट नहीं, बल्कि सहकारी विभाग के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष होना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने सिविल न्यायालय के सीमित क्षेत्राधिकार का उल्लेख करते हुए वाद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने अस्वीकार कर दी सभी मांगें

अंततः न्यायालय ने बिक्री विलेख को अवैध घोषित करने, स्वामित्व की घोषणा करने और स्थायी निषेधाज्ञा देने की सभी मांगें अस्वीकार कर दीं तथा पूरा सिविल वाद खारिज कर दिया। साथ ही आदेश दिया कि दोनों पक्ष अपने-अपने मुकदमे का खर्च स्वयं वहन करेंगे। यह फैसला लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ माना जा रहा है, हालांकि इससे जुड़े आपराधिक मामलों पर इसका स्वतः कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और वे अपने-अपने स्तर पर कानून के अनुसार जारी रहेंगे।

वादियों की मांग

1. 03.05.2006 के बिक्री विलेख (Sale Deed) को अवैध एवं शून्य घोषित किया जाए।

2. विवादित भूमि पर वादियों का स्वामित्व (Ownership) घोषित किया जाए।

3. प्रतिवादियों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) दी जाए।

वादियों का मुख्य आरोप

* वे मजदूर पंचायत गृह निर्माण सहकारी संस्था के सदस्य हैं।

* संस्था ने उन्हें प्लॉट आवंटित किए थे।

* संस्था के कथित प्रबंधक नसीम हैदर को बिक्री का अधिकार नहीं था।

* फिर भी उसने वर्ष 2006 में भूमि की फर्जी बिक्री कर दी।

* इस संबंध में IPC 420, 468, 471, 120-B के तहत आपराधिक मामला भी दर्ज है।

प्रतिवादियों का पक्ष

* अधिकांश प्रतिवादी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए।

* वर्तमान अध्यक्ष (प्रतिवादी क्रमांक 5) ने भी माना कि नसीम हैदर संस्था का अधिकृत प्रबंधक नहीं था।

कोर्ट ने क्या पाया?

* वादी यह साबित नहीं कर सके कि:

    * उन्हें विधिवत प्लॉट आवंटित हुए थे।

    * उनका स्वामित्व कानूनी रूप से सिद्ध है।

    * जिन बिक्री विलेखों को चुनौती दी गई है, वे उनके अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

* कई महत्वपूर्ण दस्तावेज (जैसे आवंटन आदेश आदि) प्रस्तुत या प्रमाणित नहीं किए गए।

सबसे महत्वपूर्ण कानूनी कारण

* यह विवाद सहकारी संस्था के प्रबंधन और अधिकारों से जुड़ा है।

* ऐसे विवादों का निपटारा मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 64 के तहत रजिस्ट्रार, सहकारी संस्थाएं करेगा।

* धारा 82 के अनुसार ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट का अधिकार (Jurisdiction) नहीं है।

कोर्ट का अंतिम निर्णय

* वादियों का दावा खारिज (Dismiss) कर दिया गया।

* बिक्री विलेख को अवैध घोषित नहीं किया गया।

* वादियों को स्वामित्व की घोषणा नहीं मिली।

* स्थायी निषेधाज्ञा भी नहीं दी गई।

* दोनों पक्ष अपना-अपना खर्च स्वयं वहन करेंगे।

इन सदस्यों ने लगाई थी आपत्ति

राकेश पिता घीसालाल मालवीय

रविन्द्र पटेल पिता सालीगराम पटेल

अभिषेक त्रिपाठी पिता राजेन्द्र त्रिपाठी

ज्योत्सना पति महेन्द्र कुमार

अर्चना गुप्ता पिता बंशीधर गुप्ता

सपना अग्रवाल पिता बंशीधर अग्रवाल

सुभाष सिहाग पिता सीताराम सिहाग

अंजली पति अभिलाष खांडेकर

अर्चना पति भंवरलाल जैन

संगीता पति राजेन्द्र जैन

दिव्या पिता हेमंत सोजतिया

डॉ.हेमंत कुमार पिता डॉ.आरएम सोजतिया

विजया पति कमलेश सोजतिया

उमाशंकर पिता कल्याण सहाय अग्रवाल

गोपाल स्वामी पिता शंकरलाल स्वामी

नंदकिशोर पिता हरिशंकर मिश्रा

प्रभा पिता जवनचंदजी पांडेय

शशिबाला पति अजय श्रीवास्तव

प्रतिभा दुबे पति तानाजी दुबे

तानाजी दुबे पिता रामभाऊ दुबे

Harish Fatehchandani
Harish Fatehchandanihttp://www.hbtvnews.com
Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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