इंदौर। शराब के फर्जी चालान घोटाले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने इंदौर में 49 करोड़ के आबकारी फर्जी चालान घोटाले में जांच के बाद 70 करोड़ की संपत्तियां अटैच की हैं। यह संपत्तियां इंदौर, मंदसौर और खरगोन में स्थित हैं।
उल्लेखनीय है कि शराब ठेकेदारों द्वारा ट्रेजरी चालान में हेरफेर के मामले में रावजी बाजार थाने में केस दर्ज होने के बाद ईडी ने छापे भी मारे थे। जांच के बाद ईडी ने 70 करोड़ की संपत्तियां अटैच की है। ईडी की पीएमएलए जांच में यह खुलासा हुआ है कि राजू दशवंत, अंश त्रिवेदी और अन्य शराब ठेकेदार जालसाजी और धोखाधड़ी में शामिल थे। इन पर आपराधिक षड्यंत्र का आरोप है। इससे पहले ईडी ने मुख्य आरोपी राजू दशवंत और अंश त्रिवेदी को गिरफ्तार किया था। दोनों जेल में हैं।
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पहले 49 करोड़ का था घोटाला
उल्लेखनीय कि इंदौर में आबकारी फर्जी चालान घोटाले का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले यह घोटाला 49 करोड़ रुपए का सामने आया था, लेकिन ईडी की जांच में यह बढ़कर 71 करोड़ तक पहुंच गया है। घोटाले की शुरुआत करीब 8 साल पहले हुई थी, जब रावजी बाजार थाने में आबकारी विभाग ने 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई थी। उस समय कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया था, जिनकी विभागीय जांच धीमी गति से चलती रही और कई बाद में बहाल भी हो गए।
18 ठिकानों पर ईडी ने मारे थे छापे
कुछ समय पहले ही ईडी ने इंदौर के 18 ठिकानों पर छापा मारा था। इनमें एमजी रोड समूह के अविनाश और विजय श्रीवास्तव, जीपीओ चौराहा समूह के राकेश जायसवाल, तोपखाना समूह के योगेंद्र जायसवाल, बायपास देव गुराडिया समूह के राहुल चौकसे, गवली पलासिया समूह के सूर्यप्रकाश अरोरा, गोपाल कुशवाह, लवकुश और प्रदीप जायसवाल के नाम सामने आए। ईडी सूत्रों के अनुसार, अब तत्कालीन सहायक आयुक्त संजीव दुबे, डीएस सिसोदिया, सुखनंदन पाठक, कौशल्या सबनानी, धनराज सिंह परमार और अनमोल गुप्ता को पूछताछ के लिए समन भेजा गया है।


