सरकार को चूना लगा रहे सहायक खनिज अधिकारी डामोर सस्पेंड, प्रभारी जयदीप नामदेव राजनीतिक टेका लगाकर अभी भी डटे

Date:

इंदौर। खनिज माफियाओं से सांठगांठ कर सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाने वाले सहायक खनिज अधिकारी चैन सिंह डामोर को कलेक्टर एवं प्रभारी संभागायुक्त आशीष सिंह ने निलंबित कर दिया है। लेकिन, ट्रांसफर के बावजूद इंदौर में पांव जमा कर बैठे प्रभारी खनिज अधिकारी जयदीप नामदेव का बाल भी बांका नहीं हुआ है। 140 करोड़ रुपए का चूना लगाने के बाद भी नामदेव अपने आकाओं के दम पर अभी भी इंदौर में टिके हैं और आगे भी टिके रहने का दंभ भर रहे हैं।

संभागायुक्त द्वारा 1 फरवरी को जारी डामोर के निलंबन में कहा गया है कि लापरवाही, आदेशों का पालन नहीं करने तथा सरकार को राजस्व की हानि पहुंचाने का कारण उन्हें निलंबित किया जा रहा है। संभागायुक्त ने अपने आदेश में लिखा है कि निलंबन अवधि के दौरान डामोर का मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय (भूअभिलेख शाखा) जिला इंदौर में रहेगा। डामोर को मेसर्स अंचेरा कंस्ट्रशन द्वार ग्राम धरनावद तहसील राऊ जिला इंदौर स्थित भूमि खसरा क्रमांक 19/1/5 (एस) रकबा 1.3810 हेक्टेयर पर अनुमति से ज्यादा खनिज मुरम की खुदाई पर निलंबित किया गया है। यहां 8380 घनमीटर खुदाई की अस्थाई अनुज्ञा जारी की गई थी, जबकि जांच में मौके पर भारी मात्रा में खुदाई मिली है। शिकायत मिलने के बाद डामोर को जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने जांच नहीं की। फिर अपर कलेक्टर ने 30 जनवरी को इसकी जांच और माप करवाई थी। इसमें गड़बड़ी मिलने पर डामोर को निलंबित किया गया है।

कहीं निशाना तो नहीं बन गए डामोर

डामोर के निलंबन पर एक सवाल यह भी उठ रहा है कि कहीं उन्हें निशाना तो नहीं बनाया गया है, क्योंकि वे लगातार कुछ खनिज माफियाओं को खिलाफ शिकायत करते रहे हैं। अभी हाल ही में उन्होंने प्रभारी खनिज अधिकारी जयदीप नामदेव के खासमखास खनिज माफिया गौरव पाल के खिलाफ प्रतिवेदन दिया था। इसमें गौरव की खदान स्थित क्रेशर मशीन से लिया गया गिट्‌टी से भरा एक डंपर पकड़े जाने का जिक्र था। खास बात यह कि डंपर भी गौरव पाल का ही था। डामोर के इस प्रतिवेदन पर जयदीप नामदेव ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे पहले पिछले साल भी डामोर ने गौरव पाल के खिलाफ ऐसा ही प्रतिवेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

140 करोड़ का चूना लगाने के बाद भी है प्रभार

वर्तमान में प्रभारी खनिज अधिकारी जयदीप नामदेव का ट्रांसफर सीधी हो चुका है, लेकिन उन्हें रिलीव नहीं किया जा रहा। उनका दावा है कि उन्हें इंदौर से कोई नहीं हटा सकता और वे अपना ट्रांसफर रुकवा लेंगे। वे इसके लिए उज्जैन कनेक्शन का हवाला भी देते हैं। यह वही नामदेव हैं, जिन्होंने संजय शुक्ला की खदान पर अवैध उत्खनन के केस में 140 करोड़ की पेनल्टी लगाई थी, लेकिन मामले कि ऐसी लीपापोती कर दी कि सरकार को एक रुपया भी नहीं मिले। नामदेव ने मौक पर सील की गई क्रेशर मशीन भी अभिरक्षा में नहीं रखी, जिसके कारण खनिज माफियाओं ने उसे गायब कर दिया। नामदेव की लापरवाही का आलम यह है कि अभी तक इसकी एफआईआर भी नहीं हो पाई। संभागायुक्त दीपक सिंह भी नामदेव को दोषी पा चुके हैं, लेकिन वह अभी भी इंदौर में ही टिका हुआ है और खनिज माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार को करोड़ों का चूना लगा रहा है।

पूरे कुएं में ही घुली हुई है भांग

खनिज विभाग एक ऐसा विभाग है, जहां पूरे कुएं में ही भांग घुली हुई है। जब यहां से खनिज अधिकारी संजय लुणावत का ट्रांसफर हुआ तो प्रशासन के आला अफसरों ने भी चैन की सांस ली थी कि चलो एक गंदगी रवाना हुई। इसके बाद बिना योग्यता जयदीप नामदेव को प्रभारी बना दिया गया। संभागायुक्त द्वारा दोषी पाए जाने के बाद भी नियमों के विपरित प्रभारी बन बैठे नामदेव को जैसे भ्रष्टाचार का लाइसेंस मिल गया। कहा जाता है कि अगर लुणावत भ्रष्टाचार में 2.0 वर्जन के थे, तो वहीं नामदेव 4.0 वर्जन के हैं। इतने भ्रष्टाचार और सरकार को नुकसान पहुंचाने के बाद भी उनका यहां टिके रहना कई सवाल खड़े करता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

इंदौर। यशवंत क्लब में इन दिनों चुनाव का माहौल है। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है। इसी बीच एक सदस्य की चिट्‌ठी चर्चा का विषय बन गई है। इस सदस्य ने डॉ.सुरेंद्र दिल्लीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सदस्य ने सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि दिल्लीवाल चुपके से उसकी मंगेतर के फोटो और वीडियो बना रहे थे। यशवंत क्लब के सदस्य अधिवक्ता देवाशीष दुबे ने सचिव को लिखा है कि मैं यह पत्र अत्यंत पीड़ा और व्यथा के साथ लिख रहा हूं। मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जिस घटना का वर्णन मैं करने जा रहा हूं, वह हमारे प्रतिष्ठित क्लब में घटित हो सकती है, जिसे हम सभी गर्व से अपना दूसरा घर कहते हैं। 15 अप्रैल की रात का है मामला पत्र में दुबे ने लिखा है कि 15 अप्रैल 26 को लगभग 9:00 बजे, मैं अपने मंगेतर (जिनकी पहचान मैं उजागर नहीं करना चाहता और कानून के अनुसार पीड़िता की पहचान सुरक्षित रखी जानी चाहिए) के साथ क्यू बॉल कैफे के सामने रात्रि भोजन के लिए बैठा था। हमारे सामने कुछ वरिष्ठ सदस्य बैठे हुए थे, जिनसे हमारा कोई संवाद नहीं था। लगभग 10 बजे, स्पाइस डेक (रेस्तरां) का एक वेटर/रिसेप्शनिस्ट हमारी मेज पर आया और हमें यह जानकारी दी कि सामने बैठे वरिष्ठ सदस्यों में से एक सदस्य मेरी मंगेतर की लगातार फोटो/वीडियो ले रहा है। वीडियो बनाते सदस्य ने खुद देखा दुबे ने लिखा है कि चूंकि यह किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध एक गंभीर आरोप है, इसलिए मैंने तुरंत कोई आवेशपूर्ण प्रतिक्रिया नहीं दी। मैं अपनी सीट से उठा और वॉटरफॉल क्षेत्र की ओर गया, जहां से स्पष्ट रूप से देखा कि उक्त वरिष्ठ सदस्य मेरी मंगेतर की फोटो/वीडियो बना रहा था। उसी समय मैंने अपनी मंगेतर से कहा कि वह उस सदस्य का वीडियो बनाए (उक्त वीडियो मैंने व्हाट्सएप के माध्यम से समिति के सदस्यों को भेज दिया है)। उस वीडियो में यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि वह मेरी मंगेतर का वीडियो बना रहा है। मोबाइल मांगा तो अन्य वरिष्ठों ने किया हस्तक्षेप इसके पश्चात मैंने उस वरिष्ठ सदस्य का सामना किया और उससे उसका मोबाइल फोन सौंपने को कहा, ताकि उन फोटो/वीडियो को देखा जा सके। वहां बैठे अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने हस्तक्षेप किया, जिससे संभवतः आरोपी को उक्त फोटो/वीडियो डिलीट करने का अवसर मिल गया, क्योंकि वह लगातार अपने फोन का उपयोग कर रहा था, बजाय स्थिति का सामना करने या अपना बचाव करने के। वेटर ने की घटना की पुष्टि इसके बाद, मैंने उस वेटर को बुलाया जिसने हमें सूचना दी थी, और उसने अन्य वरिष्ठ सदस्यों के सामने इस घटना की पुष्टि भी की। इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि क्लब के सीसीटीवी कैमरों, संबंधित वेटर तथा वहां उपस्थित अन्य वरिष्ठ सदस्यों के माध्यम से की जा सकती है। एक जिम्मेदार सदस्य होने के नाते, मैंने संयम बनाए रखा और किसी भी प्रकार की शारीरिक झड़प में शामिल नहीं हुआ, बल्कि इस लिखित शिकायत के माध्यम से उचित कार्रवाई की मांग कर रहा हूँ। संस्था के हित में पुलिस में नहीं की शिकायत सदस्य दुबे ने लिखा है कि मैंने अब तक तुकोगंज पुलिस स्टेशन, इंदौर में प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई है, केवल इसलिए कि हमारे प्रतिष्ठित संस्थान की छवि सुरक्षित रहे।  मेरा विनम्र मत है कि हमारा क्लब एक ऐसा स्थान है जहां हमारे परिवार स्वयं को सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। इस शांति और सुरक्षा को किसी भी प्रकार से भंग नहीं किया जाना चाहिए। चुनाव नहीं होता तो बाहर नहीं आती शिकायत उल्लेखनीय है कि यशवंत क्लब चुनाव के लिए मैदान सज चुका है। अध्यक्ष पद के दो दावेदार पम्मी छाबड़ा और अजय बागड़िया एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। दूसरी तरफ सचदेवा और गोरानी ने अपनी टीम की घोषणा कर दी है। सूत्र बताते हैं कि यशवंत क्लब में आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन मामला बाहर नहीं आता। अभी चूंकि चुनाव का माहौल चल रहा है, इसलिए ऐसी शिकायतें बाहर आ रही हैं। अब देखना यह है कि पीड़ित सदस्य को टोनी सचदेवा और संजय गोरानी की टीम न्याय दिलाती है या फिर पम्मी छाबड़ा और अजय बागड़िया की टीम।