आस्था, रोमांच और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 आज सिक्किम के नाथू ला दर्रे से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई। कई वर्षों के इंतजार के बाद शुरू हुई इस पवित्र यात्रा में इस वर्ष 500 श्रद्धालु 10 अलग-अलग जत्थों में भगवान शिव के पावन धाम माउंट कैलाश और पवित्र मानसरोवर झील के दर्शन के लिए रवाना होंगे।
भारत और चीन के समन्वय से आयोजित इस बहुप्रतीक्षित यात्रा के लिए व्यापक प्रशासनिक, चिकित्सा और लॉजिस्टिक तैयारियां की गई हैं। प्रत्येक जत्थे में 50 यात्री शामिल हैं, जिनके साथ एक संपर्क अधिकारी और एक मेडिकल सहायक भी तैनात रहेगा, ताकि पूरी यात्रा सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

यात्रा शुरू होने से पहले चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने वीडियो संदेश जारी कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश साझा किए। भारतीय दूतावास ने बताया कि विदेश मंत्रालय और चीन सरकार के सहयोग से आयोजित यह यात्रा 20 जून से भारतीय क्षेत्र से रवाना हो रही है।
नाथू ला सीमा पार करने के बाद यात्रियों का स्वागत चीनी इमिग्रेशन और सीमा शुल्क अधिकारी करेंगे, जिसके बाद उन्हें बसों के माध्यम से तिब्बत के याडोंग काउंटी ले जाया जाएगा। यात्रियों के लिए ठहरने, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और करेंसी एक्सचेंज जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध, जैन और बॉन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माउंट कैलाश भगवान शिव का निवास स्थान है, जबकि मानसरोवर झील को पृथ्वी की सबसे पवित्र झीलों में गिना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन दिव्य यात्रा को जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव मानते हैं।
भारतीय दूतावास ने यह भी संकेत दिया है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नई एडवाइजरी, वीडियो गाइड और महत्वपूर्ण अपडेट लगातार जारी किए जाएंगे, जिससे यात्रियों को हर चरण में सहायता मिल सके।



