भारत रूस से तेल खरीद जारी रखेगा, ट्रंप के दावे के उलट फैसला आर्थिक और रणनीतिक कारणों पर आधारित
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए दावे के विपरीत, भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला कीमत, तेल की गुणवत्ता, लॉजिस्टिक सुविधा और आर्थिक मजबूरियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
👉 यह भी पढ़ें:
- मार्को रुबियो का बड़ा बयान — “भारत की चिंता पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठन, ईरान मध्यस्थता नहीं”
- ईरान पर ट्रंप का बड़ा बयान — “जल्दबाजी में नहीं होगा समझौता, मैं खराब डील नहीं करता”
- मैं प्रधानमंत्री मोदी से बहुत प्यार करता हूं” — ट्रंप बोले, भारत अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा कर सकता है
- इबोला के बढ़ते खतरे पर भारत सतर्क, अफ्रीकी देशों की यात्रा से बचने की सलाह
डोनाल्ड ट्रंप ने 30 जुलाई को भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसे 1 अगस्त से लागू किया जाना था। हालांकि बाद में इसे 7 अगस्त तक के लिए टाल दिया गया। टैरिफ के पीछे अमेरिका का तर्क था कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से रूस को आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे वह यूक्रेन पर हमला जारी रखने में सक्षम हो रहा है।
ट्रंप ने अपने हालिया बयान में दावा किया था कि भारत अब रूस से तेल आयात बंद करने वाला है। हालांकि, भारत की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया, बल्कि सूत्रों ने पुष्टि की है कि भारत फिलहाल रूस से तेल खरीद जारी रखेगा।
रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल निर्यातक है, जो प्रतिदिन करीब 4.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल और 2.3 मिलियन बैरल परिष्कृत उत्पादों का निर्यात करता है। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक तेल बाज़ार में अस्थिरता आ गई थी, जिससे मार्च 2022 में तेल की कीमतें $137 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
भारत ने उस चुनौतीपूर्ण समय में भी अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन करते हुए रूस से तेल खरीदना जारी रखा था। भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 85 प्रतिशत तेल आयात करता है और यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है।
भारत की यह रणनीति उसकी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक बाज़ार में मूल्य स्थिरता बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है।


