मोदी सरकार के 11 साल: मध्यवर्ग को केंद्र में रखकर आसान, सम्मानजनक और सुलभ जीवन की दिशा में निरंतर प्रयास
जल्द ही सत्ता में 11 साल पूरे करने जा रही मोदी सरकार ने एक रिपोर्ट के ज़रिए दावा किया है कि इस अवधि में जनता की आशाओं, जरूरतों और आकांक्षाओं को न केवल सुना गया, बल्कि उन पर उद्देश्यपूर्ण ढंग से काम भी किया गया।
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मध्यवर्ग को केंद्र में लाकर बनाई गई नीतियां
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की अनुसंधान इकाई द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते 11 वर्षों में मध्यवर्ग को देश की प्रगति के केंद्र में रखा गया।
- कर राहत,
- पेंशन योजनाएं,
- और सरल व्यवस्था जैसे कदमों के जरिए सरकार ने मध्यवर्ग के जीवन को आसान, निष्पक्ष और अधिक सम्मानजनक बनाने की दिशा में ठोस कार्य किया है।
लालफीताशाही का अंत और प्रक्रियाओं में सरलता
रिपोर्ट के अनुसार:
- सरकार ने लालफीताशाही को समाप्त किया,
- नियमों को आसान बनाया,
- और दैनिक जीवन से जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक सुलभ बनाया।
चाहे बात हो कर भरने की, घर खरीदने, दवा खरीदने, या रोजगार के लिए आने-जाने की—हर क्षेत्र में सरलता और पारदर्शिता लाई गई है।
कर व्यवस्था में बड़ा बदलाव
वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में किए गए सुधारों के तहत:
- अब सालाना ₹12 लाख तक की आय पर, पूंजीगत लाभ जैसी विशेष आय को छोड़कर, कोई आयकर नहीं देना होगा।
- सरलीकृत कर व्यवस्था और आसान रिटर्न दाखिल प्रक्रिया लागू की गई है।
- यह कदम नागरिकों को उनकी आय का बड़ा हिस्सा अपने पास रखने के मूल विचार को दर्शाता है।
गरीब कल्याण पर विशेष जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा एनडीए सरकार गरीब कल्याण के प्रति समर्पित एक सहानुभूतिपूर्ण सरकार रही है।”
पिछले एक दशक में सरकार ने गरीबी उन्मूलन, सशक्तीकरण, बुनियादी ढांचा, और समावेशन पर ध्यान केंद्रित किया।
प्रमुख योजनाएं:
- प्रधानमंत्री आवास योजना: गरीबों को आवास उपलब्ध कराया
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: सुरक्षित खाना पकाने के ईंधन की सुविधा
- जनधन योजना: बैंकिंग सेवाओं की व्यापक पहुंच
- आयुष्मान भारत: गरीबों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ
निष्कर्ष: सुधारों की निरंतरता ही असली उपलब्धि
रिपोर्ट में सरकार के प्रयासों को “बिखरे हुए बदलाव नहीं, बल्कि एक सतत सुधार प्रक्रिया” बताया गया है, जिसका लक्ष्य आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाना रहा है।
सरकार का दावा है कि उसने सिर्फ वादे नहीं किए, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए प्रणाली में स्थायी और सार्थक बदलाव भी किए हैं।


