कर्नाटक की सत्ता अब डीके शिवकुमार के हाथों में पहुंच गई है, लेकिन कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिए हैं कि सिद्धारमैया की राजनीतिक पारी अभी खत्म नहीं हुई है। मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपने के बाद भी पार्टी उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने की तैयारी में है।
कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में डीके शिवकुमार को सर्वसम्मति से नेता चुने जाने के तुरंत बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिद्धारमैया को आराम नहीं करने देगी, क्योंकि उनकी जरूरत सिर्फ कर्नाटक ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी है।
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वेणुगोपाल ने कहा, “सिद्धारमैया जी के सच्चे कांग्रेसी समर्पण ने सभी का दिल जीत लिया है। बीजेपी को उम्मीद थी कि नेतृत्व परिवर्तन के दौरान कांग्रेस में बड़ा संकट पैदा होगा, लेकिन सिद्धारमैया ने अपने फैसले से उन सभी अटकलों को गलत साबित कर दिया।”
सूत्रों के मुताबिक, नेतृत्व परिवर्तन से पहले कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को राज्यसभा सीट और दिल्ली में एक अहम राष्ट्रीय जिम्मेदारी की पेशकश की थी। पार्टी उन्हें 2029 लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के प्रमुख ओबीसी चेहरे के रूप में स्थापित करना चाहती थी। हालांकि 78 वर्षीय नेता ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय बने रहने का फैसला किया।
सत्ता हस्तांतरण के बाद सिद्धारमैया ने शिवकुमार को बधाई देते हुए भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने की रक्षा के लिए “दूसरे स्वतंत्रता संग्राम” का आह्वान किया और कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने की अपील की।
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन भले ही पूरा हो गया हो, लेकिन कांग्रेस के भीतर अब एक नया सवाल चर्चा में है—क्या सिद्धारमैया आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति में और बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं, या फिर कर्नाटक की राजनीति में ही किंगमेकर बने रहेंगे?
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