इंदौर में प्रधान आरक्षक की आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया है, जिसमें फिरोज खान नामक प्रधान आरक्षक के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में फिरोज खान पर आय के अनुपात से कहीं अधिक संपत्ति रखने का आरोप है।
लोकायुक्त की इंदौर और देवास में 15 स्थानों पर छापेमारी
लोकायुक्त पुलिस की इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीम ने 14 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 6 बजे फिरोज खान और उसके परिजनों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस छापेमारी में इंदौर के विभिन्न इलाकों और देवास में कुल 15 ठिकानों पर दस्तावेज और संपत्ति से जुड़ा सामान जब्त किया गया।
जांच के दौरान स्कीम नंबर 94 के मनोरमा अपार्टमेंट में दो फ्लैट और श्रीनगर कॉलोनी के श्रीदेवी अपार्टमेंट में एक फ्लैट समेत कई फ्लैट्स, मकान और पेंटहाउस के कागजात मिले। इसके अलावा, कृषि भूमि और व्यावसायिक भूखंड भी शामिल थे।

प्रधान आरक्षक की आय और संपत्ति में भारी अंतर
लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में पता चला कि फिरोज खान की सेवा अवधि के दौरान अनुमानित वेतन आय लगभग ₹75 लाख है, जबकि कुल वैध आय लगभग ₹1.93 करोड़ के आसपास आंकी गई। इसके बावजूद उनकी कुल संपत्ति ₹6.26 करोड़ से अधिक पाई गई, जो उनकी आय से लगभग 223% ज्यादा है।
यह अनुपातहीन संपत्ति इस बात का संकेत है कि प्रधान आरक्षक ने अपनी आधिकारिक आय के अलावा अन्य स्रोतों से अवैध संपत्ति अर्जित की है, जिस पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई जारी है।
फ्लैट्स, जमीन और फर्मों में निवेश का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया कि फिरोज खान ने अपनी मां, पत्नी और एक परिचित महिला के नाम पर कई फर्मों और संपत्तियों में निवेश किया था। इन फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति खरीदी गई।
देवास के बागली क्षेत्र में कृषि भूमि, प्लॉट और व्यावसायिक भूखंड भी आरोपी के नाम पर दर्ज पाए गए। इसी तरह, इंदौर में कई फ्लैट्स और मकान भी शामिल हैं, जो उनकी आय से मेल नहीं खाते।

लोकायुक्त ने 22 बैंक खातों की जांच शुरू की
लोकायुक्त पुलिस को फिरोज खान के 22 बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनमें से 17 खातों का लेन-देन जांच के दायरे में है। इन खातों में कुल जमा राशि लगभग ₹10 लाख पाई गई है।
बैंक खातों से धन निकासी पर रोक लगाई गई है और शेयर बाजार व म्यूचुअल फंड में किए गए निवेशों की भी जांच की जा रही है। इससे पता चलता है कि आरोपी ने अपने वित्तीय लेन-देन को छुपाने के लिए विभिन्न तरीके अपनाए।
विभागीय कार्रवाई और निलंबन
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय के एसपी वाहिनी सिंह ने 18 अक्टूबर 2026 को फिरोज खान को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा, पिछले एक साल से उनकी गैरहाजिरी को लेकर विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
यह कार्रवाई विभाग में अनुशासन बनाए रखने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी सजा दर्शाती है। आगे की जांच में और तथ्य सामने आने की संभावना है।
आम जनता और पुलिस विभाग पर प्रभाव
इस मामले ने पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर किया है। आम आदमी के लिए यह संदेश है कि सरकारी कर्मचारियों की पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
इसके अलावा, यह मामला अन्य अधिकारियों के लिए भी सतर्कता का सबक है ताकि वे अपनी संपत्ति के स्रोत को साफ रखें और नियमों का पालन करें।



