केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में विपक्ष के ‘रिजीम चेंज’ विरोधी रवैये को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत बांग्लादेश जैसा देश नहीं है, जहां सत्ता परिवर्तन हिंसक या गैरसंवैधानिक तरीकों से हो। यह बयान विपक्ष के ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल और उससे जुड़े विवाद के बीच आया है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का सख्त संदेश
17 अक्टूबर 2026 को किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “बड़े आए ‘रिजीम चेंज’ करने वाले! कान खोलकर सुन लो, भारत बांग्लादेश नहीं है!” उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय युवा मूर्ख नहीं हैं और वे देश की प्रगति में लगे हैं। रिजिजू ने युवाओं की तारीफ करते हुए कहा कि वे स्टार्टअप, इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।
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रिजिजू के इस बयान ने विपक्ष के उस रवैये पर सवाल उठाए हैं, जो ‘रिजीम चेंज’ शब्द का इस्तेमाल कर राजनीतिक असंतोष जाहिर कर रहा है।

विपक्ष और एक्टिविस्टों के बयानों पर प्रतिक्रिया
यह विवाद दिल्ली में विपक्ष और एक्टिविस्टों द्वारा ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल के बाद शुरू हुआ। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस शब्द का प्रयोग किया था। नेहा बोरा ने बांग्लादेश के Gen-Z छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए उसे लोकतंत्र के लिए प्रेरणादायक बताया था।
प्रशांत भूषण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि यह एक ‘रिजीम चेंज’ की लड़ाई है और वे इसे पूरा करेंगे। पवन खेड़ा ने भी इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताया। इन बयानों पर रिजिजू ने कड़ा विरोध जताया।
राजनाथ सिंह ने भी विपक्ष पर लगाए आरोप
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 अक्टूबर को लखनऊ में कहा कि विपक्ष और प्रदर्शनकारी ‘रिजीम चेंज’ की आड़ में बांग्लादेश जैसी अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाना चाहते हैं। उन्होंने इस तरह की साजिशों को देश के लिए खतरा बताया।
इस बयान ने राजनीतिक विवाद और बढ़ा दिया, जिससे भाजपा और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई।

विपक्ष ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सत्ता परिवर्तन की बात कही
विपक्ष ने साफ किया है कि सत्ता परिवर्तन केवल चुनाव और जनता के जनादेश के माध्यम से ही हो सकता है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया संवैधानिक होती है। उन्होंने 1977 के उदाहरण का हवाला देते हुए बताया कि जब भी विपक्ष सड़कों पर उतरता है, तो लोकतंत्र मजबूत होता है।
इस प्रकार, विपक्ष ने अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सीमित रखने पर जोर दिया।
भारतीय युवाओं की भूमिका और देश के विकास में योगदान
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने युवाओं को देश के निर्माण में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा मूर्ख नहीं हैं और वे देश को बर्बाद नहीं करेंगे। इसके बजाय, वे स्टार्टअप्स, स्किलिंग, इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और खेल के क्षेत्र में सफलता हासिल कर रहे हैं।
यह बयान युवाओं की सकारात्मक भूमिका को उजागर करता है और असंतोष फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।
राजनीतिक बहस का प्रभाव और आगे की संभावनाएं
यह राजनीतिक बहस इस बात को दर्शाती है कि सत्ता परिवर्तन को लेकर मतभेद गहरा गए हैं। हालांकि, लोकतंत्र में विरोध और आलोचना स्वाभाविक हैं। इस मुद्दे पर संवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन जरूरी होगा।
आगामी समय में यह देखना होगा कि विपक्ष और सरकार कैसे इस विवाद को सुलझाते हैं और देश के युवाओं को विकास के रास्ते पर बनाए रखते हैं।



