मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर भागीरथपुरा कांड की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला उस लंबे इंतजार के बाद आया है, जब इस कांड की जांच पूरी हुई और रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सौंपा गया था। अब इस रिपोर्ट को अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा, जिससे याचिकाकर्ता और वकील इसे आसानी से देख सकेंगे।
हाईकोर्ट ने न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की अनुमति दी
हाईकोर्ट ने भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट पर लगी गोपनीयता की रोक हटाई है। रिपोर्ट को स्कैन कर एक-दो दिनों के भीतर वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा। इस कदम से मामले की पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रभावित लोगों के हित में न्याय प्रक्रिया और अधिक खुलकर चलेगी।
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इस फैसले से यह भी साबित होता है कि न्यायालय जनता के सामने मामले की पूरी जानकारी लाना चाहता है ताकि न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास बना रहे।
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की पृष्ठभूमि
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में 26 दिसंबर 2025 से 25 फरवरी 2026 तक दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार हुए और मौतें हुईं। इस त्रासदी के बाद कुल सात जनहित याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल हुईं।
दूषित पेयजल में सीवेज का पानी मिलने की वजह से यह घटना हुई, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
जांच आयोग का गठन और रिपोर्ट की प्रस्तुति
हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को इस मामले की स्वतंत्र जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग बनाया था। आयोग ने अगस्त 2026 में लगभग 600 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश की।
यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दी गई थी, जिससे जांच की गंभीरता और निष्पक्षता की पुष्टि हुई।
रिपोर्ट में मौतों और प्रशासनिक विफलता के तथ्य
जांच आयोग ने कुल 36 मौतों की जांच की, जिनमें 24 की मौत दूषित पानी पीने से हुई। शेष 12 मामलों में पानी के कारण मौत का संबंध स्पष्ट नहीं हुआ।
रिपोर्ट ने पुरानी और टूटी पाइपलाइन के कारण सीवेज पानी पेयजल में मिलने की मुख्य वजह बताई। प्रशासन की लापरवाही और पाइपलाइन बदलने में देरी ने इस त्रासदी को जन्म दिया।
मुआवजे की सिफारिश और भविष्य की संभावना
रिपोर्ट में मृतकों के परिजनों को 20 लाख रुपए और बीमारों को 5 लाख रुपए मुआवजा देने की सिफारिश की गई है। यह आर्थिक सहायता प्रभावित परिवारों के लिए राहत का काम करेगी।
इसके अलावा, प्रशासन पर दबाव बढ़ेगा कि वह जल आपूर्ति प्रणाली को शीघ्र सुधारें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने से आम जनता पर असर
रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से आम जनता को मामले की पूरी सच्चाई पता चलेगी। इससे जनता के मन में प्रशासन और न्यायालय के प्रति विश्वास बढ़ेगा।
याचिकाकर्ता और वकील रिपोर्ट का अध्ययन कर आगे की कानूनी कार्रवाई बेहतर तरीके से कर सकेंगे। इसलिए यह फैसला न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



