ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री और भारी छूट के विरोध में अखिल भारतीय केमिस्ट और ड्रगिस्ट संगठन ने आज देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस बंद के चलते देशभर में करीब 12 लाख 50 हजार से अधिक मेडिकल दुकानें प्रभावित रहेंगी।
संगठन का कहना है कि ई-फार्मेसी और तुरंत दवा पहुंचाने वाले मंच बिना पर्याप्त निगरानी और सख्त नियमों के काम कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक दवा कारोबार पर गंभीर असर पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
👉 यह भी पढ़ें:
- सोनमर्ग में बादल फटा: सड़कों पर मलबा और कीचड़, श्रीनगर-लेह हाईवे बंद
- प्रशासन ने 85 वर्षीय पुष्पलता मंगल की इच्छा का रखा ध्यान, कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम ने समाप्त किया प्रकरण
- Online Piracy पर सरकार का बड़ा वार: 7,393 लिंक ब्लॉक, 4,996 Telegram Channels पर भी कार्रवाई
- Delhi Metro Alert: 23 जुलाई को 16 मेट्रो स्टेशन बंद! राजीव चौक समेत इन स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद, जानें पूरी लिस्ट
- Maharashtra Rain Alert: भारी बारिश से Mumbai-Pune Expressway बंद, भूस्खलन के बाद हाई अलर्ट; पुणे के स्कूलों में छुट्टी
- Iran vs US War: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, अमेरिकी ठिकानों पर हमलों का दावा! क्या मध्य पूर्व में शुरू हो गया है सबसे बड़ा सैन्य टकराव?
संगठन के अनुसार बिहार में करीब 40 हजार दवा दुकानें बंद रहेंगी। हालांकि, देशव्यापी बंद के बावजूद बड़ी दवा श्रृंखलाएं, अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी सामान्य रूप से खुले रहेंगे।
उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख के कई खुदरा फार्मेसी संगठनों ने बंद में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। इन राज्यों में दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने का आश्वासन भी दिया गया है। हालांकि कर्नाटक के कुछ हिस्सों और मध्य प्रदेश में बंद का असर अधिक देखने को मिल सकता है।
हाल ही में संगठन के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय दवा नियामक से मुलाकात कर ई-फार्मेसी के संचालन और नियमों को लेकर अपनी चिंताएं रखी थीं।
संघठन के मुताबिक खुदरा मेडिकल दुकानें सख्त पर्ची आधारित व्यवस्था के तहत काम करती हैं और एंटीबायोटिक, नशीली दवाओं तथा गर्भपात किट जैसी संवेदनशील दवाओं का पूरा रिकॉर्ड रखती हैं।
ऑनलाइन दवा व्यवस्था में नकली पर्चों के जरिए प्रतिबंधित दवाओं तक आसान पहुंच संभव हो रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
सूत्रों के मुताबिक, दवा नियामक ने संगठन को भरोसा दिलाया है कि उनकी चिंताओं की समीक्षा की जा रही है और ई-फार्मेसी क्षेत्र के लिए सख्त नियामक ढांचे पर विचार किया जा रहा है।



