तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। एआईएडीएमके के भीतर गहरा संकट खड़ा हो गया है, जहां 36 नवनिर्वाचित विधायकों ने पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पूर्व मंत्री सी. वी. षणमुगम के नेतृत्व में विद्रोही गुट ने पलानीस्वामी पर एकतरफा फैसले लेने और पार्टी हितों से ज्यादा निजी स्वार्थ को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है। चुनाव में हार के बाद उठी इस बगावत ने पार्टी के दो हिस्सों में बंटने का खतरा पैदा कर दिया है।
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षणमुगम खेमे के नेताओं का कहना है कि पलानीस्वामी के फैसलों से पार्टी लगातार कमजोर हो रही है।
एआईएडीएमके ने इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और 47 सीटें जीती थीं, जबकि गठबंधन को कुल 53 सीटें मिलीं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी की एक सीट भी शामिल है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि षणमुगम और पूर्व मंत्री एसपी वेलुमणि ने अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के साथ चुनाव बाद गठबंधन की संभावनाएं भी तलाश की थीं, क्योंकि विजय की पार्टी बहुमत से थोड़ा पीछे रह गई थी।
वहीं सूत्रों का दावा है कि दूसरी ओर पलानीस्वामी गुपचुप तरीके से डीएमके का समर्थन हासिल करने की कोशिश में जुटे थे।



