मोदी कैबिनेट ने अटल पेंशन योजना 2030-31 तक बढ़ाई, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक को इक्विटी सहायता देने की भी मंजूरी

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नई दिल्ली। मोदी कैबिनेट ने असंगठित और कम आय वर्ग के करोड़ों लोगों को बड़ी राहत देते हुए अटल पेंशन योजना की अवधि बढ़ा दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस योजना को 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी गई। इस फैसले से उन कामगारों को सीधा फायदा मिलेगा, जिनके पास रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का कोई साधन नहीं होता।

कैबिनेट के फैसले के तहत अटल पेंशन योजना के लिए सरकारी सहयोग जारी रहेगा। इसमें योजना के प्रचारप्रसार, क्षमता निर्माण और विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए फंडिंग शामिल है। इसके साथ ही, योजना को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए गैप फंडिंग को भी मंजूरी दी गई है, ताकि भविष्य में भी पेंशन भुगतान में कोई बाधा आए। अटल पेंशन योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 60 वर्ष की आयु के बाद 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की गारंटीड मासिक पेंशन मिलती है। पेंशन की राशि लाभार्थी के योगदान पर निर्भर करती है। यह योजना खासतौर पर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले लोगों के लिए बनाई गई है, जिन्हें किसी भी तरह की औपचारिक पेंशन सुविधा उपलब्ध नहीं होती। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 19 जनवरी 2026 तक अटल पेंशन योजना से 8.66 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। सरकार का मानना है कि योजना की लोकप्रियता और स्थिरता बनाए रखने के लिए लंब समय तक समर्थन जरूरी है।

इसके साथ ही कैबिनेट ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) को 5,000 करोड़ रुपये इक्विटी सहायता प्रदान करने की मंजूरी दी गई। यह इक्विटी पूंजी वित्तीय सेवा विभाग के माध्यम से SIDBI में डाली जाएगी। 5,000 करोड़ रुपये की राशि तीन चरणों (ट्रांच) में दी जाएगी। इससे करीब 25.74 लाख नए एमएसएमई लाभार्थी जुड़ेंगे। 5000 करोड़ रुपये के इक्विटी पूंजी निवेश के बाद वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले एमएसएमई की संख्या वित्त वर्ष 2025 के अंत में 76.26 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2028 के अंत तक 102 लाख होने की उम्मीद है। एमएसएमई मंत्रालय की वेबसाइट के नवीनतम आंकड़ों (30.09.2025 तक) के अनुसार 6.90 करोड़ एमएसएमई द्वारा 3016 करोड़ रोजगार सृजित किए गए हैं। इस औसत को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक 25.74 लाख नए एमएसएमई लाभार्थियों के जुड़ने से 1.12 करोड़ नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।

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