भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और पति नरेंद्र मरावी का तलाक, 5 साल से थे अलग

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भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र मरावी का तलाक अब आधिकारिक रूप से हो चुका है। इस फैसले से संबंधित तलाक की प्रक्रिया अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम न्यायालय में पूरी हुई, जहाँ 3 सितंबर 2026 को आपसी सहमति से तलाक की डिक्री पारित की गई। यह खबर उन सभी के लिए महत्वपूर्ण है जो हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी के वैवाहिक संबंधों को लेकर अपडेट्स की तलाश में थे।

भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और पति नरेंद्र मरावी का तलाक कैसे हुआ?

हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का वैवाहिक जीवन करीब नौ साल तक चला। दोनों की शादी 23 नवंबर 2017 को राजेंद्रग्राम में हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुई थी। हालांकि, शादी के कुछ वर्षों बाद ही उनके बीच मतभेद शुरू हो गए। विशेष रूप से 2021 से दोनों अलग रहने लगे थे।

न्यायालय में प्रस्तुत याचिका में हिमाद्री सिंह ने बताया कि अब उनके वैवाहिक जीवन को आगे जारी रखना संभव नहीं है। उन्होंने और उनके पति ने आपसी सहमति से विवाह विच्छेद की मांग की। कोर्ट ने इस मामले में छह महीने का सुलह अवधि प्रदान की, लेकिन दोनों के बीच पुनर्मिलाप संभव नहीं हो सका।

तलाक के फैसले में बेटी की स्थिति और गुजारा भत्ते का मामला

तलाक की डिक्री में स्पष्ट किया गया कि दोनों की बेटी गिरिशा सिंह अपनी मां हिमाद्री सिंह के साथ रहेगी। हिमाद्री सिंह ने पति से किसी भी प्रकार के गुजारा भत्ते की मांग नहीं की है। यह फैसला दोनों पक्षों की सहमति से किया गया, जिससे यह मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा।

कोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार, बेटी के पालन-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य का पूरा खर्च हिमाद्री सिंह उठाएंगी। दोनों पक्षों ने विवाह के दौरान मिले उपहारों और आभूषणों को लेकर भी कोई विवाद नहीं जताया।

आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया और न्यायालय की भूमिका

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत तलाक की यह प्रक्रिया पूरी हुई। न्यायालय ने दोनों को पहले छह महीने का समय दिया ताकि वे सुलह कर सकें। इस अवधि में पुनर्मिलाप के प्रयास असफल रहे।

इसके बाद दोनों ने अदालत को सूचित किया कि वे अपने दांपत्य जीवन को जारी नहीं रखना चाहते। न्यायालय ने उनका यह आवेदन स्वीकार कर तलाक की डिक्री जारी की। इस प्रकार यह मामला बिना किसी विवाद या आरोप-प्रत्यारोप के खत्म हुआ।

भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह का राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन पर असर

हिमाद्री सिंह वर्तमान में शहडोल से भाजपा सांसद हैं और सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। तलाक के बाद वे अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों पर फोकस बनाए रखेंगी। यह फैसला उनके निजी जीवन में बदलाव लाएगा, लेकिन उनका सार्वजनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित होने की संभावना कम है।

वहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा संकल्प अभियान और पार्टी के अन्य कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई है। तलाक के बावजूद हिमाद्री सिंह का राजनीतिक करियर जारी रहने की उम्मीद है।

विवाह विच्छेद के बाद आम जनता और सामाजिक संदर्भ

इस तरह के उच्च स्तरीय सार्वजनिक व्यक्तित्व के तलाक से समाज में वैवाहिक जीवन के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह मामला दर्शाता है कि आपसी सहमति से विवाह विच्छेद संभव है और इसे सम्मानपूर्वक निपटाया जा सकता है।

साथ ही, यह घटना आम लोगों के लिए भी एक उदाहरण है कि विवादों को सुलझाने में अदालतें मध्यस्थता कर सकती हैं। इससे परिवारों में तनाव कम करने में मदद मिलती है।

भविष्य में हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी के संबंध

तलाक के बाद दोनों ने अपने व्यक्तिगत जीवन में अलग-अलग रास्ते चुने हैं। बेटी की जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह संभालेंगी, जबकि दोनों ने आपसी सम्मान बनाए रखा है।

आगे आने वाले समय में दोनों के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में यह फैसला किस तरह प्रभाव डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, दोनों ने अपने रिश्ते को कानूनी रूप से समाप्त कर लिया है।

Harish Fatehchandani
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Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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