भारत-पाकिस्तान सीजफायर पर ट्रंप के दावे को जयशंकर ने फिर किया खारिज, कहा- अमेरिका की कोई भूमिका नहीं
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे को एक बार फिर सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह निर्णय भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच आपसी बातचीत के जरिए हुआ था, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से।
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सीधे संवाद से हुआ था सीजफायर समझौता
डेनमार्क के एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और पाकिस्तान की सेनाओं ने आपस में सीधे संवाद कर सैन्य कार्रवाई को रोकने का निर्णय लिया था। उन्होंने यह भी दोहराया कि इसमें अमेरिका या उसके तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोई भूमिका नहीं थी।
आतंकवाद को बताया वैश्विक चुनौती
साक्षात्कार के दौरान जयशंकर ने आतंकवाद को आज की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा, “जब हम वैश्विक मुद्दों पर बात करते हैं, तो आतंकवाद एक गंभीर और व्यापक समस्या के रूप में सामने आता है, जो पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है।”
पड़ोसी देश से आ रहा आतंकवाद
विदेश मंत्री ने अप्रैल में भारत पर हुए एक गंभीर आतंकवादी हमले का हवाला देते हुए कहा कि यह घटना बहुत दर्दनाक थी। उन्होंने कहा कि इस हमले के पीछे वे आतंकी संगठन थे जो भारत के पड़ोसी देश में खुलेआम फल-फूल रहे हैं और जिन्हें राज्य का संरक्षण प्राप्त है। इसी कारण भारत को कुछ दिनों तक सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी।
सीजफायर में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं
जयशंकर ने दोटूक शब्दों में कहा कि सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए जो समझौता हुआ, वह भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच सीधे संवाद का नतीजा था और इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।
निष्कर्ष: भारत की स्पष्ट नीति
एस. जयशंकर की यह टिप्पणी भारत की उस नीति को रेखांकित करती है, जिसमें वह द्विपक्षीय मुद्दों को किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के बजाय आपसी बातचीत से सुलझाने को प्राथमिकता देता है। ट्रंप के दावे को खारिज कर भारत ने एक बार फिर अपने रुख को स्पष्ट कर दिया है।



