ट्रेन से 2 लाख टन भारतीय गेहूं बांग्लादेश पहुंचा है, जो देश के लिए गेहूं की आपूर्ति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहली बार है जब 2022 में लगे निर्यात प्रतिबंधों के बाद बांग्लादेश ने इतनी बड़ी मात्रा में भारतीय गेहूं की खरीद की है।
रेल मार्ग से बांग्लादेश पहुंची बड़ी खेप
भारत से बांग्लादेश तक 2 लाख टन गेहूं की खेप रेल के माध्यम से भेजी गई है। इस परिवहन माध्यम से समय और लागत दोनों की बचत हुई है। बांग्लादेश के आयातकों ने इस बड़ी खरीद को लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिए सुनिश्चित किया है।
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गेहूं की कीमतें और सौदा मूल्य
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह डील प्रति टन $306 से $326 के भाव पर हुई है। इसमें परिवहन लागत शामिल है। भारत सरकार ने अगस्त 2026 में गेहूं के निर्यात पर लगी पाबंदी को हटाकर इसे मुक्त कर दिया था। इससे बांग्लादेशी व्यापारियों को बड़ी मात्रा में गेहूं खरीदने का रास्ता खुला।
बांग्लादेश में खाद्य संकट और गेहूं की मांग
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ब्लैक सी समुद्री मार्ग पर बाधा आई थी, जिससे बांग्लादेश में गेहूं की आपूर्ति प्रभावित हुई। पिछले महीने गेहूं के आटे की कीमतें 17% तक बढ़ गई हैं। चावल की बढ़ती कीमतों के कारण लोग अब गेहूं की ओर रुख कर रहे हैं।

घरेलू उत्पादन बनाम जरूरतें
बांग्लादेश में सालाना करीब 70 लाख टन गेहूं की जरूरत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन मात्र 10 लाख टन है। 2022 के प्रतिबंध से पहले बांग्लादेश अपनी जरूरत का 70% से अधिक गेहूं भारत से आयात करता था। इस बार की बड़ी खरीद से यह परंपरा फिर जीवित होती दिख रही है।
तारिक रहमान सरकार का खाद्य संकट से मुकाबला
बांग्लादेश में वर्तमान में तारिक रहमान की सरकार खाद्य संकट से निपटने के लिए सक्रिय है। इसी के तहत भारत से गेहूं की इस बड़ी खेप की खरीद की गई है। यह कदम देश में अनाज की उपलब्धता को बेहतर करने में मदद करेगा।
अन्य देशों की भारतीय गेहूं में रुचि
भारत के गेहूं निर्यात बाजार में वापसी के बाद न केवल बांग्लादेश, बल्कि श्रीलंका ने भी हाल ही में 60,000 टन भारतीय गेहूं की खरीद की है। यह डील लगभग $325 प्रति टन की दर से हुई है। इससे साफ होता है कि भारत का गेहूं अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से मजबूत स्थिति में आ गया है।



