डिजिटल कैंची से जल्द हटाएं फेक वीडियो, यह निर्देश इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने जारी किया है। 8 अक्टूबर 2026 को जारी इस एडवाइजरी में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को फर्जी और भ्रामक वीडियो व कंटेंट हटाने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा गया है।
प्रदर्शनों के कारण बढ़ी फेक वीडियो की चिंता
हाल ही में दिल्ली और मुंबई में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर भ्रामक और गलत सूचनाओं का प्रसार हुआ। सरकार ने इस पर गहरी चिंता जताई है क्योंकि ऐसे कंटेंट सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकते हैं। 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन के मद्देनजर यह एडवाइजरी खास महत्व रखती है।
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सोशल मीडिया पर एआई-संशोधित कंटेंट की लेबलिंग अनिवार्य
एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि एआई द्वारा तैयार या संशोधित वीडियो और तस्वीरों पर ‘AI-Generated’ का लेबल लगाना जरूरी होगा। खासकर जब इसे प्रदर्शन या संवेदनशील घटनाओं से जोड़ा गया हो। इससे यूजर्स को असली और नकली कंटेंट में फर्क समझने में मदद मिलेगी।
आईटी नियमों के तहत हटाने की सख्त समय-सीमा
फरवरी 2026 में संशोधित आईटी नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को सरकार या अदालत के आदेश पर अवैध कंटेंट को तीन घंटे के भीतर हटाना होगा। अश्लीलता या पहचान चोरी जैसे मामलों में यह समय दो घंटे तक घट जाता है। सामान्य शिकायतों का निपटारा 36 घंटे के भीतर करना जरूरी होगा।
सेफ हार्बर संरक्षण खोने की चेतावनी
सरकार ने साफ किया है कि यदि सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो वे कानूनी सुरक्षा से वंचित हो जाएंगी। इसका मतलब है कि वे आपराधिक और नागरिक दावों के लिए जिम्मेदार ठहराई जा सकती हैं। इससे कंपनियों पर कंटेंट मॉडरेशन का दबाव बढ़ेगा।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पूरा सहयोग देने के निर्देश
एडवाइजरी में टेक कंपनियों को कानून प्रवर्तन और पुलिस एजेंसियों को आवश्यक जानकारी देने को भी कहा गया है। यह मदद जांच प्रक्रिया को तेज करने और अपराध रोकने में सहायक होगी। समयसीमा के भीतर जवाब देना कंपनियों की जिम्मेदारी होगी।
डिजिटल कैंची से फेक वीडियो हटाने का प्रभाव
इस कदम से सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का प्रसार कम होगा। आम जनता को भरोसेमंद जानकारी मिलेगी और सार्वजनिक व्यवस्था बेहतर बनी रहेगी। हालांकि, तकनीकी और मॉडरेशन चुनौतियां बनी रहेंगी। आगे सरकार और कंपनियों के बीच समन्वय जरूरी है।



