कलेक्टर शिवम वर्मा के पास पहुंचा डेली कॉलेज का मामला, जांच के साथ ही 12 नवंबर को होने वाली डीसी बोर्ड की मीटिंग पर रोक लगाने की मांग

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इंदौर। लंबे समय से विवादों में रहे डेली कॉलेज का मामला अब कलेक्टर शिवम वर्मा के पा पहुंच गया है। डेली कॉलेज के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात कर वहां चल रही गलत गतिविधियों की पूरी जानकारी दी। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने 12 नवंबर को बुलाई गई डीसी बोर्ड की मीटिंग पर रोक लगाने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से कहा कि डीसी बोर्ड ने 25 अक्टूबर को एक नोटिस जारी कर 12 नवंबर को एक बैठक बुलाई है। इसमें बोर्ड के सिर्फ 9 सदस्य ही उपस्थित रहेंगे। नियम के विपरित यह मीटिंग बुलाकर डीसी बोर्ड संविधान में संशोधन करना चाहता है जिससे कि वह हमेशा सत्ता में रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इससे जुड़ा केस अभी सक्षम अधिकारी के समक्ष लंबित है और यह बोर्ड अपने पावर का दुरुपयोग कर संविधान में संशोधन कर के अपना हित पूरा करना चाहता। इससे संस्थान का नुकसान होगा। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से अनुरोध किया कि पूरे मामले की जांच करवाएं तथा 12 नवंबर को होने वाली बैठक पर तत्काल रोक लगाएं। इसके साथ ही डीसी बोर्ड का चुनाव भी समय पर करवाने की मांग की गई है।

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बिना एजीएम बुलाए संविधान बदलने का प्रयास

प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को सौंपे अपने ज्ञापन में कहा है कि डीसी बोर्ड ने एक जुलाई 25 को अपनी मीटिंग में बिना एजीएम बुलाए गलत तरीके से संविधान बदलने का प्रयास किया। मध्य प्रदेश फ़र्म्स एंड सोसाइटी के नियमों के अनुसार संविधान में संशोधन के लिए एजीएम बुलाना जरूरी है। इसमें सभी श्रेणियों के सदस्यों को बुलाना चाहिए। इस गलत निर्णय के विरुद्ध हमने सब रजिस्टर महोदय के समक्ष याचिका दायर करी जिसका निर्णयअभी लंबित हैं।

29 अगस्त के आदेश का भी दिया हवाला

प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में कहा है कि पारदर्शिता एवं जवाबदेही के मकसद से सब रजिस्ट्रार इंदौर के समक्ष हमने याचिका दायर की थी। इसमें 29 अगस्त 25 को एक आदेश पारित किया गया कि डेली कॉलेज में वार्षिक आमसभा बुलाई जाए, जिसमें सभी सदस्यों को आमंत्रित किया जाए। इस आदेश के विरुद्ध डेली कॉलेज ने रजिस्ट्रार भोपाल में अपील दायर की एवं 19 सितंबर 25 को डेली कॉलेज को स्टे मिला है, लेकिन अंतिम निर्णय आना बाकी हैं। रजिस्ट्रार महोदय भोपाल का ट्रांसफर हो चुका है एवं आज वहां पर कोई भी नियुक्त नहीं हुआ है।

29 सितंबर को मनमाने तरीके से बढ़ा लिया कार्यकाल

प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर वर्मा को यह भी बताया कि डीसी बोर्ड ने 29 सितंबर 25 को एक बैठक कर स्वयं का कार्यकाल चार महीने के लिए बढ़ा लिया। नियमानुसार चुनाव इसी साल दिसंबर में हो जाना चाहिए, लेकिन बोर्ड चुनाव कराना नहीं चाहता। इस तरफ मनमाने तरीके से एक 150 साल पुरानी शैक्षणिक संस्था को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश हो रही है। बोर्ड अपनी असीमित शक्तियों का दुरुपयोग कर मनमाने निर्णय कर रहा है जो कि संस्थान एवं छात्रों के हित में नहीं है।

कलेक्टर बदलते ही शुरू कर दिया खेल

सूत्र बताते हैं कि लुल्ला ने डेली कॉलेज का संविधान बदलने के लिए फर्म एंड सोसायटी के एक अधिकारी को 20 लाख रुपए की पेशकश की थी। उक्त अधिकारी ने यह बात तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह तक पहुंचा दी। आशीष सिंह ने इस मामले में सख्त हिदायत देते हुए नियमानुसार ही काम करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उस अधिकारी ने 29 अगस्त 25 को एक आदेश देकर डेली कॉलेज में वार्षिक आमसभा बुलाने को कहा था। इसके बाद लुल्ला भोपाल पहुंच गए और वहां से एक वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से इस पर स्टे ले आए।

लुल्ला के रहते ही दो बार बढ़ा कार्यकाल

उल्लेखनीय है कि कई पैरेंट्स और ओल्ड डेलियन डीसी बोर्ड के कार्यकाल को मनमाने तरीके से बढ़ाने पर सवाल उठा रहे हैं। लुल्ला के रहते हुए ही डेली कॉलेज के इतिहास में 2020 और 2025 में दो बार कार्यकाल बढ़ा। इस वर्ष जो छह माह के लिए कार्यकाल बढ़ा उसकी कोई जरूरत ही नहीं थी। इसका मतलब साफ है कि आप डीसी बोर्ड पर अपना कब्जा रखना चाहते हो।

बैंक डिफाल्टर व्यक्ति बोर्ड का मेंबर कैसे?

पैरेंट्स और सदस्यों का सवाल है कि धीरज लुल्ला जैसा बैंक डिफाल्टर व्यक्ति बोर्ड का चुनाव कैसे लड़ लेता है और मेंबर बना रहता है। सदस्यों ने बताया कि यह नियमों के विपरित है। एचडीएफसी बैंक ने उनके तथा उनके परिवार के नाम संपत्ति कुर्की का नोटिस भी निकाला था। इसमें पिगडंबर स्थित उनकी फैक्ट्री और त्रिवेणी कॉलोनी के मकान की नीलामी की सूचना प्रकाशित हुई थी। इसके बाद भी चुनाव लड़ते रहे हैं।

संघ के माध्यम से डायरेक्ट एंट्री की कोशिश

ओल्ड डेलियन, पैरेंट्स और कई सदस्यों का कहना है कि लुल्ला ने हाल ही में जारी संवाद बुकलेट में खुद को आगे चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है। वह ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि संघ के कुछ पदाधिकारियों के माध्यम से वे राज्य सरकार से सीधे नामित होने की कोशिश में हैं। लुल्ला के हस्तक्षेप से ही संघ के एक पदाधिकारी को डेली कॉलेज में 30 करोड़ का ठेका मिला है और दूसरे संस्थान की अन्य गतिविधियों मे लिप्त हैं। संघ के दूसरे पदाधिकारी ही सरकारी विभागों में हस्तक्षेप कर लुल्ला की मदद कर रहे हैं। इतना ही नहीं संघ के पदाधिकारी के कहने में आकर भोपाल के दो अधिकारी इंदौर के अधिकारियों पर इस बात के लिए दबाव बना रहे हैं कि यह संशोधन हो जाए। कई सदस्यों का मानना है कि लुल्ला संघ के इन्ही पदाधिकारियों के माध्यम से संविधान संशोधन की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वर्तमान बोर्ड का ही कब्जा बना रहे। पैरेंट्स और सदस्यों ने संघ मुख्यालय तक यह मामला पहुंचा दिया है और नागपुर में मिलने का समय भी मांगा है। समय मिलते ही पूरी स्थिति प्रमाण सहित पेश कर दी जाएगी।

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