कर्मचारीगण गृह निर्माण संस्था की वरीयता सूची को लेकर सहकारिता आयुक्त से डीआर की शिकायत, आईडीए भी कर रहा पड़ताल

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इंदौर। वर्षों से विवादित कर्मचारीगण कर्मचारी गृह निर्माण संस्था की वरीयता सूची को लेकर सहकारिता आयुक्त से भी डीआर को शिकायत की गई है। डीआर ने कोर्ट की आड़ में वरीयता सूची फाइनल कर दी है और अब गेंद इंदौर विकास प्राधिकरण के पाले में डाल दी है। सहकारिता विभाग ने सूची फाइनल कर कोर्ट को तो दे दी, लेकिन यह नहीं बताया कि इसको लेकर कितने केस पेंडिंग है। ईओडब्ल्यू की जांच तक को छुपा लिया गया है। विवाद होने के बाद अब आईडीए भी अपने स्तर से इसकी पड़ताल कर रहा है।

सूत्र बताते हैं कि सहकारिता विभाग के पूर्व उप अंकेक्षक आनंद पाठक एक भूमाफिया के साथ मिलकर यह पूरा खेल जमा रहे हैं। वह भूमाफिया कई प्रकरणों में जेल भी जा चुका है। संस्था की वरीयता सूची का मामला लंबे समय से विवादों में है। इस पर ईओडब्लू, सहकारिता विभाग से हाईकोर्ट तक में कई केस हैं। मामले की जांच–पड़ताल चल रही है। इस बीच सहकारिता विभाग ने बड़ी ही चालाकी से हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले की आड़ में वरीयता सूची सौंप दी। हाईकोर्ट ने इंदौर विकास प्राधिकरण को आदेश दिए कि इस सूची के आधार पर प्लॉट का आवंटन 24 नवंबर तक कर दे।

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आईडीए ने भी शुरू कर दी पड़ताल

इस मामले की शिकायत आईडीए सीईओ तक पहुंची है। इसके बाद आईडीए सीईओ ने भी अपने स्तर से पड़ताल शुरू कर दी है। बताया जाता है कि उन्होंने अपने विधि अधिकारी को पूरी जानकारी निकालने को कहा है। आईडीए सीईओ को संस्था के एक सदस्य बालेश चौरसिया ने भी शिकायत की है। इसमें सहकारिता विभाग से लेकर हाईकोर्ट में चल रहे प्रकरणों का हवाला दिया गया है। इस शिकायत को लेकर आईडीए गंभीर है।

संस्था के सदस्य चौरसिया ने की आयुक्त से शिकायत

संस्था के सदस्य बालेश चौरसिया ने आयुक्त सहकारिता से डीआर की शिकायत की है। इसमें हाईकोर्ट के एक आदेश तथा अन्य प्रकरणों का हवाला देते हुए कहा गया है कि संस्था द्वारा प्रेषित वरीयता सूची के आधार पर प्लॉटों का आवंटन नहीं करें। चौरसिया ने इस सूची को अवैधानिक बताया है। शिकायत में इस संबंध में चल रहे सारे प्रकरणों का हवाला देते हुए कहा कि इसके बाद भी उपायुक्त महोदय ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों से मिलीभगत कर सूची आईडीए को भेज दी है। नियमों का हवाला देते हुए इसमें लिखा गया है कि उपायुक्त महोदय को समस्त जानकारी हाने के बाद भी अपने वरिष्ठ अधिकारी से वरीयता सूची का सत्यापन परीक्षण न कराते हुए और हाईकोर्ट में दायर याचिका को भी न मनाते हुए संस्था की सूची प्रकाशित की जा रही है।

पाठक ने प्लॉटों के लालच में किया है सौदा

सूत्र बताते हैं कि इसी संस्था के उप अंकेक्षक रह चुके आनंद पाठक ने भूमाफियाओं के साथ मिलकर यह सारा खेल जमाया है। इसकी फीस के तौर पर पाठक ने 10 प्लॉट संस्था से मांगे हैं। पाठक के कहने पर ही डीआर ने पूरा खेल जमाया है। यही वजह है कि वरिष्ठ अधिकारियों की आपत्ति के बाद भी सूची फाइनल कर दी गई है। इतना ही नहीं पाठक ने हर संबंधित विभाग के अधिकारियों के नाम पर सदस्यों से प्रति प्लॉट 20-20 लाख रुपए की वसूली भी की है। पाठक का दावा है कि हाईकोर्ट के निर्देश के आधार पर अब तो आईडीए को प्लॉट आवंटित करना ही पड़ेगा। पाठक अपने उज्जैन कनेक्शन का दावा भी कर रहा है।

ईओडब्ल्यू के प्रकरण की भी की अनदेखी

इस मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई (ईओडब्ल्यू) में प्रकरण पंजीबद्ध है। ईओडब्ल्यू ने 23 सितंबर 25 को ही सुरेंद्र जैन सहकारी निरीक्षक इंदौर, एनके राठौर सेवानृवित्त वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक इंदौर, बीएल मकवाना, संयुक्त आयुक्त सहकारिता, इंदौर, राधेश्याम गरोठिया सहकारी निरीक्षक इंदौर सहित संस्था के सदस्यों को नोटिस जारी किया था। इन सभी को 25 सितंबर 25 को भोपाल में बयान के लिए बुलाया था। वरीयता सूची फाइनल करते समय इस केस का भी ध्यान नहीं रखा गया।

संयुक्त आयुक्त ने भी उठाई थी आपत्ति

संयुक्त आयुक्त सहकारिता बीएल मकवाना के पत्र को भी अनदेखा कर दिया। भूमाफियाओं से मिलीभगत कर उपायुक्त ने कोर्ट के बहाने अब गेंद इंदौर विकास प्राधिकरण के पाले में डाल दी है। उल्लेखनीय है कि संयुक्त सहकारिता बीएल मकवाना ने कर्मचारीगण गृह निर्माण सहकारी संस्था की वरीयता सूची को लेकर उपायुक्त को 10 अक्टूबर 25 को एक पत्र भेजा था। इसमें उपायुक्त के 17 जून 25 के भेजे पत्र का हवाला दिया गया था। मकवाना ने अपने पत्र में संस्था के ऑडिट और सदस्यों की संख्या को लेकर आपत्ति उठाई थी। इसके बाद उन्होंने उपायुक्त को सूची वापस कर दी थी।

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