क्या अब तक लोकल बस की तरह चल रही थी इंडिगो!

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पिछले कई दिनों से इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट्स लगातार कैंसिल हो रही है। पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। इसका कारण जान सबको हैरानी हो रही है। कहा जा रहा है कि क्रू की कमी के कारण फ्लाइट रद्द हो रही है और ऐसा तब हो रहा है जब डीजीसीए ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी।

सबको याद होगा कि अहमदाबाद में 12 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट क्रैश होने की वजह से 241 लोगों की मौत हो गई थी। जब इसके कारणों की जांच की गई थी, तब क्रू मेंबर के थके होने की भी बात सामने आई थी। अन्य भी बहुत सारे कारण सामने आए।

जैसा अपने देश में अक्सर होता है कि सारी संबंधित एजेंसियों की नींद कोई घटनादुर्घटना के बाद ही खुलती है। इस मामले में भी वैसा ही हुआ। डीजीसीए अचानक जागा और उसने बहुत सारे सख्त नियम लागू कर दिए। इसके कारण कुछ समय तक एयर इंडिया के विमानों पर भी प्रभाव पड़ा था। अब डीजीसीए ने 1 नवंबर से क्रू को लेकर नया नियम लागू किया है। इन नियमों के मुताबिक क्रू मेंबर का रेस्टिंग टाइम बढ़ा दिया गया है। नाइट फ्लाइट कम कर दी गई है। ड्यूटी टाइम कम होने से इंडिगो जैसी कंपनियों की हालत टाइट हो गई।

क्योंकि, अब तक इंडिगो लोकल बस की तरह चल रही थी यानी कम से कम स्टाफ में ज्यादा से ज्यादा उड़ानें संचालित की जा रही थीं। पायलट एसोसिएशन ने भी ऐसे ही आरोप लगाए हैं। इंडिगो में नई हायरिंग पूरी तरह बंद है। अतिरिक्त पायलट भी नहीं है। इसलिए डीजीसीए के नए नियमों से इंडिगो के प्राण अटक गए। इसी कारण एक महीने में ही इंडिगो को करीब 1400 उड़ानें रद्द करनी पड़ी।

अब आप सोच रहे होंगे कि इसका असर दूसरी एयरलाइन पर क्यों नहीं पड़ा, तो इसका जवाब है कि इंडिगो भारत में सबसे ज्यादा घरेलू उड़ानें संचालित करती है। इंडिगो के मुकाबले एयर इंडिया, विस्तारा और अकासा की नाइट उड़ानें कम हैं।

यहां बड़ा सवाल यह है कि अगर अहमदाबाद हादसा नहीं होता और 241 की बलि नहीं चढ़ती तो क्या हवाई यात्रियों की सुरक्षा हवा हवाई ही रहती।

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