वंदे मातरम पर चर्चा में सपा चीफ अखिलेश यादव ने भाजपा को राष्ट्र विवादी पार्टी बता दिया, इंडिगो संकट पर भी उठाए सवाल

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वंदे मातरम पर चर्चा में सपा चीफ अखिलेश यादव ने भाजपा को राष्ट्र विवादी पार्टी बता दिया, इंडिगो संकट पर भी उठाए सवाल
वंदे मातरम पर चर्चा में सपा चीफ अखिलेश यादव ने भाजपा को राष्ट्र विवादी पार्टी बता दिया, इंडिगो संकट पर भी उठाए सवाल

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को संसद में वंदे मातरम पर चर्चा में भाजपा को राष्ट्रवादी नहीं बल्कि राष्ट्र विवादी पार्टी बता दिया। अखिलेश ने कहा कि भाजपा अपने आप को राष्ट्रवादी पार्टी बोलती है लेकिन राष्ट्र विवादी पार्टी है। जहां विवाद करना हो वहां इनके (भाजपा) लोग सबसे आगे रहते है। अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार हमला बोलते हुए कहा है कि सनातन धर्म के सबसे बड़े आयोजन महाकुंभ के समय में भी लोगों के महंगे टिकट खरीदने पड़े थे। सपा चीफ ने कहा कि इंडिगो ने सरकार को झुका दिया है। कारण क्या है?

अखिलेश ने कहा कि सरकार दावा करती है कि चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में बैठ सकता है, अब इतने महंगे टिकट में जूते पहनने वाले भी नहीं बैठ सकते। इंडिगो द्वारा डीजीसीए का आदेश नहीं मानने पर अखिलेश यादव ने कहा कि डॉ राम मनोहर लोहिया जी ने कहा था कि कैपिटलिस्ट किल्स कैपिटलिस्ट और जब पूंजीवादी हावी हो जाएंगे सरकार पर तो ऐसा ही होगा।

वंदे मातरम गाने के साथ निभाना भी चाहिए

संसद में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर होने वाली चर्चा पर समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव सरकार पर हमला बोला। सपा चीफ ने कहा कि गाने से ज्यादा निभाने की जरूरत है। अखिलेश यादव ने वंदे मातरम ने देश को एक किया और आज़ादी की लड़ाई में जान डाली। सत्ता पक्ष हर चीज पर कब्जा करना चाहता है। सत्ता पक्ष हमेशा सब कुछ अपना बनाना चाहता है। ये लोग हर बात का श्रेय लेने चाहते हैं, जो महापुरुष इनके नहीं हैं, ये लोग उनपर भी कब्जा करने की कोशिश करते हैं। इनकी बातों से ऐसा लगता है कि वंदे मातरम् भी इन्हीं का बनवाया हुआ गीत है। अखिलेश यादव ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं है, बल्कि इसका पालन करने के लिए है। जिन्होंने कभी आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, वे वंदे मातरम का महत्व कैसे समझेंगे? वेराष्ट्रवादीनहीं बल्कि राष्ट्रवादी लोग हैं। सच तो ये है कि कुछ लोग आजादी के दीवानों के लिए जासूसी और मुखबिरी का भी काम करते थे।

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