मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच ने बड़ी गुत्थी सुलझाई है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए भारतीय पासपोर्टों में से 31 पासपोर्ट निरस्त कर दिए गए हैं। इस मामले में डबरा क्षेत्र से 17 पासपोर्ट जुड़े पाए गए हैं, जो जांच में सामने आए इस फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की गहराई को दर्शाता है।
मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट मामले में 31 पासपोर्ट निरस्त
विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की जांच के बाद मध्य प्रदेश में 70 संदिग्ध पासपोर्टों में से 31 को पासपोर्ट विभाग ने रद्द किया है। बाकी 39 पासपोर्टों को भी निरस्त करने की प्रक्रिया चल रही है। यह कार्रवाई फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय नागरिकता का दुरुपयोग रोकने के लिए की गई है।
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पासपोर्ट निरस्तीकरण से स्पष्ट होता है कि इस फर्जी दस्तावेजों के जाल में कितनी व्यापकता थी और प्रशासनिक स्तर पर जांच की जरूरत है।

डबरा के सिमरिया टेकरी में 17 फर्जी पासपोर्ट मिले
निरस्त किए गए 31 पासपोर्टों में से 17 पासपोर्ट ग्वालियर जिले के डबरा क्षेत्र के सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार के एक ही पते पर बनाए गए थे। यह तथ्य इस नेटवर्क की संगठित प्रकृति को दर्शाता है।
इस पते पर बने इतने पासपोर्ट इस बात का संकेत हैं कि फर्जी दस्तावेजों के निर्माण और पासपोर्ट जारी करने में स्थानीय स्तर पर भी संलिप्तता हो सकती है।
भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र से 40 पासपोर्ट निकलकर आए
जांच में यह भी पता चला है कि भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र के अन्ना नगर स्थित बौद्ध मठ के पते से लगभग 40 पासपोर्ट बनाए गए थे। इसका मतलब यह है कि इस फर्जी पासपोर्ट सिंडिकेट का नेटवर्क ग्वालियर-डबरा से भोपाल तक फैला हुआ है।
इस तरह के व्यापक नेटवर्क से पता चलता है कि फर्जी दस्तावेज बनाने और पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में कई स्थान शामिल हैं।

फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय यात्रा की गई
एसटीएफ की जांच में यह खुलासा हुआ है कि फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर आरोपी थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जैसे देशों की यात्रा कर चुके हैं। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है।
फर्जी दस्तावेजों के कारण विदेशी देशों में घुसपैठियों की आवाजाही हुई है, जो देश की सुरक्षा नीति को प्रभावित कर सकती है।
100 से अधिक आरोपी चिन्हित, 5 गिरफ्तार
एसटीएफ ने फर्जी पासपोर्ट सिंडिकेट में 100 से अधिक आरोपियों की पहचान की है। अब तक पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें रियाल चौधरी और बिप्लव अधिकारी जैसे प्रमुख सदस्य शामिल हैं।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बताया कि बाकी आरोपी मलेशिया, इंडोनेशिया, चीन समेत अन्य देशों में छिपे हुए हैं।
प्रशासनिक स्तर पर जांच और संलिप्तता के आरोप
पासपोर्ट वेरिफिकेशन में कथित लापरवाही या संलिप्तता के कारण पंचायत स्तर, नगर पालिका डबरा और पुलिस विभाग के 15 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच चल रही है।
यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और प्रणालीगत सुधार की आवश्यकता को उजागर करता है ताकि भविष्य में फर्जी पासपोर्ट जारी होने से रोका जा सके।



