MLC चुनावों के नतीजों के बाद अमित शाह ने कांग्रेस के सफाए पर तंज कसा, जिसमें उन्होंने ‘Ballot Box इस्तीफा दो’ लिखा। यह टिप्पणी 23 अक्टूबर 2026 को चार राज्यों में हुए विधान परिषद चुनावों के परिणामों के प्रकाश में आई। इन चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और उसे 28 में से एक भी सीट नहीं मिली।
चार राज्यों में हुए MLC चुनाव और कांग्रेस का प्रदर्शन
23 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में कुल 28 विधान परिषद सीटों पर मतदान हुआ था। ये सभी सीटें शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की थीं। इस बार चुनाव ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर और बैलेट बॉक्स के जरिए कराए गए। नतीजों में कांग्रेस का पूरा सफाया हुआ और उसने 28 सीटों में से 0 सीटें जीतीं।
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अमित शाह का सोशल मीडिया पोस्ट और कांग्रेस पर तंज
परिणाम घोषित होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कांग्रेस ने 28 में से कितनी सीटें जीती… ‘0’… Ballot Box इस्तीफा दो…”। इसके साथ उन्होंने एक कार्टून भी साझा किया, जिसमें राहुल गांधी के हाथ में ‘Ballot Box इस्तीफा दो’ लिखी तख्ती थी। यह तंज कांग्रेस की बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पुरानी मांग के संदर्भ में आया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी तंज और विपक्ष पर दबाव
अमित शाह की टिप्पणी से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ‘X’ पर पोस्ट करते हुए सवाल किया था कि चार राज्यों में बैलेट पेपर से चुनाव हुए, कांग्रेस ने कितनी सीटें जीती? मोदी का यह तंज विपक्ष की चुनाव प्रक्रिया पर उठाई गई शंकाओं को चुनौती देने वाला है। इससे विपक्ष पर सियासी दबाव बढ़ा है।

अन्य दलों का प्रदर्शन और चुनाव में बदलाव
कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने सभी चार सीटों पर जीत हासिल की। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने पांच और समाजवादी पार्टी ने तीन सीटें जीतीं। बिहार में एनडीए गठबंधन ने प्रमुख सीटों पर कब्जा बनाया, वहीं जन सुराज पार्टी, राजद और निर्दलीय भी कुछ सीटों पर विजयी रहे। इससे पता चलता है कि कांग्रेस का प्रदर्शन खासा कमजोर रहा।
कांग्रेस का पलटवार और आगामी चुनावों पर असर
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भाजपा और प्रधानमंत्री को चुनौती दी कि वे बयानबाजी छोड़कर सभी आगामी चुनाव बैलेट पेपर से कराने का वादा करें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को निशाना बनाना राजनीति है, जबकि चुनाव प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यह बहस और तेज हो सकती है।
बैलेट पेपर पर चुनाव विपक्षी दलों की पुरानी मांग
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग विपक्षी दलों की पुरानी मांग रही है। इस चुनाव में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ, फिर भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बहस और गहराएगी। यह नतीजे राजनीतिक रणनीतियों और जनता के मतदान व्यवहार दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।



