सुप्रीम कोर्ट ने CJI सूर्यकांत पर टिप्पणी के मामले में संजय राउत को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। यह निर्देश 28 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया, जिसमें संजय राउत को 17 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होने को कहा गया है। यह आदेश सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ी आपराधिक अवमानना कार्यवाही के तहत जारी हुआ है।
संजय राउत को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने संजय राउत को 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है। इससे पहले 16 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने अवमानना याचिका दाखिल की थी।
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अवमानना याचिका और कारण
यह अवमानना याचिका मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और उच्च न्यायपालिका के खिलाफ सोशल मीडिया (X/ट्विटर) पर की गई टिप्पणियों को लेकर दायर की गई है। SCBA ने भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी की सहमति के बाद यह याचिका दाखिल की थी। अदालत ने इस मामले को पूरी न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा बताया है।
सह-आरोपी निखिल वागले की ऑनलाइन पेशी
इस मामले में सह-आरोपी वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को 17 नवंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश होने की अनुमति मिली है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने बताया कि वागले ने अपनी विवादित पोस्ट हटा दी है और बिना शर्त माफी मांगी है। अदालत ने इस माफी को रिकॉर्ड पर लिया है।

संजय राउत का बयान और कोर्ट की प्रतिक्रिया
संजय राउत ने मीडिया से कहा है कि वे 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में निर्देशानुसार हाजिर होंगे। हालांकि इस मामले में उनकी ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ था, जिससे अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस मामले को न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा बताया और कहा कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है।
मामले की पृष्ठभूमि और विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ जब विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात की मांग की थी, लेकिन उन्हें अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद संजय राउत ने मुख्य न्यायाधीश और न्यायपालिका के राजनीतिक संबंधों पर सवाल उठाए थे। वहीं, पत्रकार निखिल वागले ने भी सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।
आगे की कार्रवाई और संभावित प्रभाव
17 नवंबर को दोनों पक्षों की सुनवाई होगी, जिसमें अदालत दोनों का पक्ष सुन सकती है और आगे की कार्रवाई तय कर सकती है। इस मामले का आम आदमी पर भी असर हो सकता है क्योंकि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा से जुड़ा मामला है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां गंभीर अपराध हैं।



