दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव-दास से पूछा, ‘परमिशन नहीं थी तो जंतर-मंतर क्यों गए?’

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दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से पूछा कि जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति नहीं थी, तब वे वहां क्यों गए। यह सवाल 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आया। इस मामले में अदालत ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के खिलाफ दायर याचिका पर कड़ी टिप्पणियां कीं।

कोर्ट ने जंतर-मंतर जाने को लेकर सख्त सवाल किए

दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से 11 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डीनोटिफाई कर दिया था और सीजेपी को वहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका ने बैरिकेड तोड़कर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का प्रयास किया। हाईकोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब उन्हें पता था कि अनुमति नहीं है, तो वे क्यों वहां गए।

कोर्ट ने कहा कि बैरिकेड और पुलिस की अनुमति भीड़ को नियंत्रित करने के लिए होती है, ताकि प्रदर्शन हिंसात्मक न हो। अदालत ने उदाहरण देते हुए विदेशों में हुए हिंसक प्रदर्शनों का जिक्र किया, जहां छात्र प्रदर्शन हिंसा में बदल गए।

दिल्ली हाईकोर्ट में सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई

याचिकाकर्ताओं की उम्र पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की उम्र का जिक्र हुआ, जिसमें सौरव दास 27 वर्ष और आशुतोष रांका 32 वर्ष के बताए गए। इस पर जज सुब्रमण्यम प्रसाद ने टिप्पणी की, “तो आप जेन-जी नहीं हैं।” कोर्ट ने पूछा कि ‘मिलेनियल्स’ और ‘जेन-जी’ की उम्र का दायरा क्या होता है। यह सवाल याचिकाकर्ताओं की सोच और दृष्टिकोण पर भी संकेत करता है।

न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पर सवाल

दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को दोनों नेताओं को हिरासत में लिया था। 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत मिली, जो 19 अक्टूबर को दो दिन और बढ़ा दी गई। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट ने सवाल किया कि इस आदेश के खिलाफ याचिका निचली अदालत में क्यों नहीं गई और सीधे हाईकोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत क्यों दायर की गई। कोर्ट ने वैकल्पिक कानूनी उपचार अपनाने की सलाह दी।

दिल्ली हाईकोर्ट में सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई

याचिका वापस लेने के बाद सुनवाई समाप्त

दिल्ली हाईकोर्ट के सख्त रुख और कानूनी सलाह के बाद सीजेपी नेताओं के वकील अभिक चिमनी ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने इसे मंजूर कर लिया। इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत से जुड़ी याचिका खत्म हो गई।

इस फैसले से स्पष्ट हुआ कि अदालत कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा नियमों के पालन को गंभीरता से देखती है। यह कदम प्रदर्शन और कानून के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश है।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि और आम आदमी पर असर

सीजेपी के ये प्रदर्शन सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर थे। हालांकि, पुलिस ने सुरक्षा कारणों से प्रदर्शन स्थल डीनोटिफाई कर दिया था। ऐसे में प्रदर्शनकारियों का बैरिकेड तोड़ना कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनता है।

आम आदमी के लिए यह मामला यह दर्शाता है कि सार्वजनिक प्रदर्शन के अधिकार के साथ सुरक्षा और शांति बनाए रखना भी आवश्यक है। अदालत के फैसले से यह संदेश जाता है कि प्रदर्शन के नियमों का पालन करना जरूरी है ताकि समाज में शांति बनी रहे।

आगे की कानूनी कार्यवाही और संभावित परिणाम

हालांकि याचिका वापस ले ली गई है, पर पुलिस की जांच और हिरासत के आदेश जारी रहेंगे। आगे भी अदालत में इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर सुनवाई हो सकती है।

यह मामला प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए कानूनी दायरे में महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। भविष्य में प्रदर्शन से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था और अनुमति प्रक्रिया पर भी चर्चा हो सकती है।

Ardhendu Bhushan - Consulting Editor
Ardhendu Bhushan - Consulting Editorhttp://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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