एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की ऊंची कूद टी44/64 स्पर्धा में भारत के प्रवीण कुमार ने 2.05 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। इस दौरान बंटी ने 1.92 मीटर की छलांग के साथ रजत पदक हासिल किया। इस प्रदर्शन ने भारत के इस इवेंट में डबल मेडल जीतने की शानदार उपलब्धि को दर्शाया।
प्रवीण कुमार ने बनाया नया एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड
प्रवीण कुमार ने 21 अक्टूबर 2026 को आइची-नागोया में हुई पुरुषों की ऊंची कूद टी44/64 स्पर्धा में 2.05 मीटर की छलांग लगाकर नया गेम्स रिकॉर्ड स्थापित किया। पहले यह रिकॉर्ड 1.95 मीटर था, जिसे उज्बेकिस्तान के तेमुरबेक गियाजोव ने 2018 में बनाया था। प्रवीण की यह छलांग न केवल स्वर्ण पदक के लिए काफी थी, बल्कि उन्होंने अपने दमदार प्रदर्शन से सभी का दिल जीत लिया।
👉 यह भी पढ़ें:
- SBI के 3,897 ग्राहकों के डेटा लीक, नाम-मोबाइल-पता डार्क वेब पर हुआ एक्सपोज़
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अदालतें चुनावों में न्याय के लिए चुप नहीं रह सकतीं
- रुपया डॉलर के मुकाबले 8वें दिन भी मजबूत, Jio IPO और RBI की रणनीति का असर
- पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भारत भेजी गई हेरोइन व 2000 के नकली नोट पकड़े
- पीएम मोदी ने रावण दहन के मंच से कहा- देश के दुश्मनों को परास्त करना है
- ICC की ताजा रैंकिंग में भारतीय गेंदबाज ने मारी 26 स्थान की छलांग, नंबर-1 बना
प्रवीण की यह उपलब्धि उनकी बेहतरीन तैयारी और निरंतर मेहनत का परिणाम है, जो उन्हें पैरालंपिक और एशियन पैरा गेम्स में पहले भी सफलता दिला चुकी है।

बंटी का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और सिल्वर मेडल
इसी स्पर्धा में भारत के युवा एथलीट बंटी ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर अपना पर्सनल बेस्ट बनाया। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें रजत पदक से नवाजा गया। बंटी ने 1.95 मीटर की ऊंचाई पार करने का भी प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हो पाए।
बंटी की यह सफलता भारतीय एथलेटिक्स में नए प्रतिभाओं की उभरती ताकत को दर्शाती है और भविष्य में उनके लिए और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जगाती है।
टी44/64 श्रेणी की विशेषताएं और प्रतियोगिता का महत्व
टी44 और टी64 श्रेणियां पैरालंपिक खेलों में निचले अंगों से प्रभावित एथलीटों के लिए होती हैं। टी64 श्रेणी में कृत्रिम अंग का उपयोग करने वाले खिलाड़ी प्रतियोगिता करते हैं, जबकि टी44 श्रेणी में बिना कृत्रिम अंग वाले खिलाड़ी शामिल होते हैं।
इन श्रेणियों का संयुक्त आयोजन खेल में प्रतिस्पर्धा को और रोमांचक बनाता है। प्रवीण कुमार और बंटी के पदक जीतने से इस श्रेणी में भारत की मजबूती साफ दिखती है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत की पदक तालिका पर प्रभाव
प्रवीण और बंटी के पदकों ने भारत की पदक तालिका को मजबूत किया है। यह भारत का 11वां गोल्ड मेडल है, जिसमें से 10 एथलेटिक्स से आए हैं। साथ ही, इस इवेंट में भारत ने कुल पदकों की संख्या भी बढ़ाई है।
इस सफलता ने देश में पैरालंपिक खेलों के प्रति जागरूकता और समर्थन बढ़ाने में काफी मदद की है। इससे युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी।
प्रवीण कुमार का करियर और भविष्य की संभावनाएं
प्रवीण कुमार ने टोक्यो 2020 पैरालंपिक में सिल्वर और पेरिस 2024 पैरालंपिक में गोल्ड मेडल हासिल कर अपनी प्रतिभा साबित की है। एशियन पैरा गेम्स में उनका यह रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन उनकी निरंतर प्रगति का संकेत है।
आगे भी वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करते रहेंगे और नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भारत की मजबूती
इस स्पर्धा में कांस्य पदक उज्बेकिस्तान के तेमुरबेक गियाजोव ने 1.86 मीटर की छलांग से जीता। भारत का डबल मेडल प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि देश की पैरालंपिक टीम लगातार सुधार कर रही है।
भारत के खिलाड़ी अब विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं, जो देश के खेल क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।



