इंदौर में मां अहिल्या की गाथा गढ़ने के लिए एक भव्य परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना के तहत लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर स्मारक का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी कुल लागत लगभग 150 करोड़ रुपये आंकी गई है।
इंदौर में मां अहिल्या की गाथा गढ़ने की परियोजना का निरीक्षण
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 अक्टूबर 2026 को केसरबाग रोड स्थित लालबाग पैलेस परिसर में इस स्मारक स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने परियोजना के प्रथम चरण में लगभग 40 करोड़ रुपये के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। वहीं, उन्होंने स्मारक के एकीकृत विकास के लिए लालबाग पैलेस, रामपुर कोठी, चंपा बावड़ी और प्राचीन शिव मंदिर को भी योजना में शामिल करने के निर्देश दिए।
👉 यह भी पढ़ें:
- दशहरे की छुट्टी में इंदौर आ रही छात्रा की ट्रक के पहिए तले मौत
- दशहरे पर इंदौर-उज्जैन में बारिश का अलर्ट, भोपाल समेत 15 जिलों में मौसम खराब
- इंदौर में पुलिस वैन से भागे धार के दो आरोपी, राजकुमार ब्रिज के पास कूदे
- इंदौर की सिंधी कॉलोनी में आज से शुरू होगा पारंपरिक सिंधी गरबा उत्सव
- इंदौर में प्रधान आरक्षक की आय से अधिक संपत्ति का मामला, 5-6 फ्लैट खरीदे
- इंदौर के अधूरे प्रोजेक्ट पर ताई ने सीएम से में बात की

मां अहिल्या की गाथा गढ़ने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग
इस स्मारक में लोकमाता के जीवन और उनके योगदान को प्रदर्शित करने के लिए संग्रहालय, 3D प्रोजेक्शन, ऑडियो-विजुअल तकनीक और लाइट एंड साउंड शो जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल की जाएंगी। इससे पर्यटकों को एक समृद्ध और आकर्षक अनुभव मिलेगा।
निर्माण कार्य की प्रगति और समय-सीमा
वास्तुविद हिमांशु दुधवड़कर के अनुसार, भवन का लगभग 50% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इस परियोजना को 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे यह स्मारक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उपलब्ध होगा।

परियोजना का नेतृत्व और इतिहासकारों की भूमिका
देवी अहिल्याबाई होलकर स्मारक प्रतिष्ठान ट्रस्ट इस परियोजना के संचालन में सक्रिय है। ट्रस्ट के सचिव अशोक डागा और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के मार्गदर्शन में इतिहासकारों और नगर के प्रबुद्धजनों ने स्मारक की रूपरेखा तैयार की है। यह सुनिश्चित करता है कि परियोजना में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सटीकता बनी रहे।
पर्यटक आकर्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
मां अहिल्या की गाथा गढ़ने वाली इस परियोजना से इंदौर में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय व्यवसायों को भी इसका लाभ होगा। इसके अलावा, यह स्मारक नई नौकरियों का सृजन करेगा और शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा।
आगे की योजनाएं और संभावित प्रभाव
सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले परियोजना पूरी होने के बाद यह स्मारक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन जाएगा। सरकार की यह पहल न केवल मां अहिल्या के योगदान को यादगार बनाएगी, बल्कि मध्य प्रदेश के इतिहास को भी जीवंत करेगी।



