बैतूल में दूध-केला खाने से 32 बच्चे बीमार होने की घटना ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को सक्रिय कर दिया है। भीमपुर विकासखंड के भांडरी गांव में सेवा कुटीर में 16 अक्टूबर 2026 को बच्चों को दूध और केला खिलाने के बाद वे अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे।
बैतूल में दूध-केला खाने से बच्चों की तबीयत बिगड़ी
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के भीमपुर विकासखंड स्थित भांडरी गांव में शुक्रवार सुबह सेवा कुटीर में 32 बच्चों को दूध और केला खिलाया गया। इसके तुरंत बाद बच्चों को उल्टी, दस्त और घबराहट के लक्षण दिखने लगे। परिजन और स्थानीय लोग तुरंत बच्चों को भीमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
👉 यह भी पढ़ें:
स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जांच में बच्चों की हालत स्थिर बताई गई है और उन्हें खतरे से बाहर माना जा रहा है। इस घटना ने इलाके में चिंता बढ़ा दी है।

स्वास्थ्य विभाग की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई
बैतूल में दूध-केला खाने से हुई बीमारी की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा भीमपुर अस्पताल पहुंचे और उपचार की निगरानी की। उन्होंने दूध के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए।
स्वयंसेवी संस्था द्वारा संचालित सेवा कुटीर में दिए गए खाद्य पदार्थों की जांच जारी है। अधिकारियों ने कहा है कि विषाक्तता के कारण बच्चों की तबीयत बिगड़ी है, लेकिन फिलहाल सभी की स्थिति स्थिर है।
परिजन और स्थानीय लोग घटना से चिंतित
एक बच्चे के पिता सुमरत कासदे ने बताया कि उनके बच्चे को सेवा कुटीर में दूध और केला खिलाया गया था। इसके बाद बच्चे की तबीयत अचानक खराब हो गई। परिजन बच्चे को अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उसका उपचार शुरू हुआ।
स्थानीय लोगों में दूध-केला खाने से हुई बीमारी को लेकर चिंता है। वे स्वास्थ्य विभाग से पूरी जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

दूध-केला खाने से बीमारी के लक्षण और प्राथमिक उपचार
दूध-केला खाने के बाद बच्चों में उल्टी, दस्त और घबराहट के लक्षण सामने आए। यह खाद्य विषाक्तता के सामान्य संकेत हैं। बच्चों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कर प्राथमिक उपचार दिया गया।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि उचित उपचार से सभी बच्चों की हालत सुधर रही है और फिलहाल किसी को अस्पताल से रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ी।
खाद्य विषाक्तता के कारण और इसके प्रभाव
दूध और केला दोनों सामान्यतः सुरक्षित खाद्य पदार्थ हैं, लेकिन दूषित या अधपका भोजन विषाक्तता का कारण बन सकता है। बैतूल में हुई इस घटना में बरबटी के बीज भी बच्चों को दिए गए थे, जो असामान्य है।
खाद्य विषाक्तता से बच्चों का स्वास्थ्य कमजोर हो सकता है और गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। इसलिए, खाद्य सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
अब स्वास्थ्य विभाग की जांच पर निगाहें
स्वास्थ्य विभाग ने दूध के नमूने जांच के लिए भेजे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही विषाक्तता के स्रोत का स्पष्ट पता चलेगा। विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाएं तैनात की हैं।
इसके अलावा, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सेवा कुटीर और अन्य संस्थानों में खाद्य सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू करने की योजना बनाई गई है।



