अमित शाह ने नक्सलवाद का अंत और उससे जुड़ी पांच दशक की पीड़ा पर महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद का अंत होने का मतलब यह नहीं है कि क्षेत्रवासियों की दशकों पुरानी पीड़ा स्वतः समाप्त हो जाएगी। यह बात उन्होंने 15 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में दिव्यांग सहायता कार्यक्रम के दौरान डिजिटल माध्यम से कही।
नक्सलवाद का अंत और पांच दशक की पीड़ा
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद का अंत एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन यह पांच दशकों से चली आ रही पीड़ा को मिटाने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार की जिम्मेदारी केवल नक्सलवाद खत्म करना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों की दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान करना भी है। अमित शाह के अनुसार, बस्तर क्षेत्र में जो पीड़ा नक्सलवाद के कारण हुई, उसे दूर करने के लिए व्यापक पुनर्वास और सहायता योजनाएं लागू हो रही हैं।
👉 यह भी पढ़ें:
- अमित शाह का राहुल गांधी पर निशाना, कहा- चुनावों में कांग्रेस लगातार हार रही है
- अमित शाह का मध्य प्रदेश दौरा: 225 करोड़ के मिल्क प्लांट का भूमिपूजन
- जालंधर में अमित शाह की रैली में BJP कार्यकर्ता की हार्ट अटैक से मौत
- अमित शाह का बड़ा ऐलान: 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को चिट्टा मुक्त करेंगे
- अमित शाह ने लॉन्च किया नया प्रत्यर्पण पोर्टल, 36 देशों से लाए 288 भगोड़े
- दिशा सालियान मामले में संजय राउत ने एकनाथ शिंदे और अमित शाह पर लगाए आरोप
दिव्यांग सहायता कार्यक्रम में लाभार्थियों की संख्या
जगदलपुर में 5 से 7 अक्टूबर के बीच दिव्यांग सहायता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए। इनमें से करीब 1,570 लोग बस्तर क्षेत्र के नक्सल प्रभावित क्षेत्र से थे। इस कार्यक्रम के तहत कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, सुनने की मशीनें और चलने के लिए छड़ियां वितरित की गईं। यह सहायता उपकरण प्रभावित लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में सहायक होंगे।
सरकार की पुनर्वास योजना के प्रमुख आंकड़े
अमित शाह ने बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इसके अलावा, 7,500 बिना बैंक खाते वाले लोगों के खाते खोले गए हैं। पुनर्वास योजना के तहत 1,625 लोगों को इनामी राशि दी गई, जबकि 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस अभियान में 455 व्यक्तियों को रोजगार मिला और 129 लोगों को जमीन आवंटित की गई है। ये आंकड़े सरकार की नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में समग्र विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

सुरक्षा शिविरों के परिवर्तन से विकास को बढ़ावा
अमित शाह ने बताया कि सुरक्षा बलों के मौजूदा शिविरों को धीरे-धीरे सामुदायिक सहायता और सेवा केंद्रों में परिवर्तित किया जाएगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की विकास योजनाओं को गति मिलेगी। यह कदम स्थानीय लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिए सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
नक्सलवाद के कारणों और इतिहास पर अमित शाह का दृष्टिकोण
अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद गरीबी के कारण नहीं, बल्कि वैचारिक कारणों से फैला है। उन्होंने बताया कि 1970 के दशक में नक्सलबाड़ी से नक्सलवाद की शुरुआत हुई, जो बाद में कई राज्यों में फैल गया। शाह ने पिछली सरकारों पर भी टिप्पणी की कि वर्षों तक शासन करने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों का विकास नहीं हो सका। उनकी बातों से यह स्पष्ट होता है कि नक्सलवाद के कारणों को समझना और उनका समाधान खोजने के लिए नीति निर्माताओं को गंभीरता से काम करना होगा।
सरकार की प्राथमिकताएं और भविष्य की योजनाएं
अमित शाह ने यह भी कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास, सुरक्षा और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार की यह कोशिश है कि हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और समृद्धि लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद का सफाया कर हमने एक नई शुरुआत की है, लेकिन अब सबसे जरूरी है उन लोगों की मदद करना जो दशकों से पीड़ित रहे। भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में और अधिक योजनाएं लागू की जाएंगी।



