दिल्ली में पाबंदियों पर भड़के शशि थरूर ने 10 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर जोरदार प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस सांसद ने इन पाबंदियों को ‘अघोषित इमरजेंसी’ बताते हुए कहा कि देश के युवा वर्ग, खासकर Gen-Z, इसे स्वीकार नहीं करेगा।
दिल्ली में Gen-Z के खिलाफ लगाई गई कड़ी पाबंदियां
शशि थरूर ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि दिल्ली में 22,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों की युद्ध-स्तर पर तैनाती हुई है। इस कदम को उन्होंने अत्यधिक और दमनकारी करार दिया।
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मेट्रो स्टेशन बंद और ट्रेनें रद्द करने पर चिंता
थरूर ने उल्लेख किया कि विरोध को दबाने के लिए 45 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं और 250 ट्रेन सेवाएं रद्द कर दी गई हैं। इससे राजधानी के आम नागरिकों को भारी असुविधा हुई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक असहमति को दबाने की कोशिश बताया।
इंटरनेट सेवाओं की निलंबन को सरकार का पिछड़ा कदम कहा
राष्ट्रीय राजधानी के मध्य हिस्से में इंटरनेट सेवाओं को बंद करने पर थरूर ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। उनके अनुसार, Gen-Z को इस तरह की दमनकारी नीतियां स्वीकार नहीं होंगी।
जंतर-मंतर की नाकेबंदी से लोकतंत्र पर सवाल
शशि थरूर ने कहा कि लोकतांत्रिक असहमति दर्ज कराने के लिए जंतर-मंतर तक जाने वाले रास्तों को कंक्रीट बैरिकेड्स और कांटेदार तारों से बंद करना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने यह कदम सरकार की लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अवहेलना बताया।

महिला सुरक्षा को लेकर उठाए गए सवाल
थरूर ने महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर भी सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि जब दिल्ली में महिलाओं को सुरक्षा की आवश्यकता होती है, तो इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल क्यों फुर्ती से कार्य नहीं कर पाते। यह सवाल दिल्ली की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है।
प्रदर्शनकारियों की रिहाई और सरकार से संवाद की अपील
कांग्रेस सांसद ने हिरासत में लिए गए युवाओं और CJP के सदस्यों को तत्काल रिहा करने की मांग की। उन्होंने सरकार से गुजारिश की कि लाठीचार्ज के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकाला जाए। थरूर ने कहा कि Gen-Z को बेहतर व्यवस्था और सम्मान चाहिए, न कि दमन।
दिल्ली में पाबंदियों का आम जनता पर असर
इन पाबंदियों से दिल्ली के आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मेट्रो स्टेशनों के बंद होने और इंटरनेट सेवा न होने से दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, युवाओं की आवाज़ दबाने का प्रयास लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।



