मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना को लेकर पटवारियों और सरकार के बीच विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। इस विवाद में 27 पटवारियों को बर्खास्त कर दिया गया है, जिससे प्रदेश के राजस्व विभाग में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।
स्वामित्व योजना और पटवारियों का विरोध
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी की भूमि पर मालिकाना हक प्रदान करने के लिए निशुल्क रजिस्ट्री अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया में पटवारियों को ‘निष्पादक’ के रूप में हस्ताक्षर करने को कहा गया है, जिसका वे कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे केवल तकनीकी सहायता प्रदान कर सकते हैं, लेकिन दस्तावेजों पर निष्पादक के रूप में हस्ताक्षर करने से कानूनी जिम्मेदारी आ जाएगी।
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27 पटवारियों की बर्खास्तगी और सरकारी कड़ा रुख
सरकार ने 7 जिलों में प्रोबेशन पीरियड पर कार्यरत 27 पटवारियों को उनकी असहयोगी भूमिका के कारण नौकरी से बर्खास्त किया है। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि स्वामित्व योजना में सहयोग नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। देवास और रतलाम में कई पटवारियों की सेवाएं समाप्त या निलंबित कर दी गई हैं।
पटवारियों का जवाबी हड़ताल का ऐलान
बर्खास्तगी और दबाव के विरोध में पटवारी संघ ने कड़ा रुख अपनाया है। पटवारियों ने सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ दिए हैं और ऑनलाइन राजस्व कार्य बंद कर दिए हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि बर्खास्तगी वापस नहीं ली गई, तो वे पूरी तरह से हड़ताल पर चले जाएंगे।
स्वामित्व योजना का उद्देश्य और बजट
यह योजना ₹3,800 करोड़ के बजट के साथ प्रदेश के करीब 68 लाख ग्रामीण भूखंडों में से लगभग 50 लाख की निशुल्क रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखती है। इससे ग्रामीण परिवारों को भूमि मालिकाना हक सुनिश्चित होगा और भविष्य के विवादों से बचाव होगा।
सरकारी अधिकारियों की भूमिका और विवाद के कारण
सरकार ने राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और नायब तहसीलदार को भी योजना में पंजीयक के अधिकार दिए हैं, जो इस योजना में पटवारियों के विरोध का कारण बने। पटवारियों का तर्क है कि अन्य राज्यों में अधिकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में पटवारियों को निष्पादक बनाया जा रहा है, जिससे उनकी कानूनी जिम्मेदारी बढ़ जाएगी।
ग्रामीणों पर प्रभाव और आगे की स्थिति
स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री में विलंब से ग्रामीणों को भूमि के मालिकाना हक मिलने में देरी हो रही है। रोजाना औसतन 3500 से 4000 रजिस्ट्रियां होती थीं, लेकिन अब इस प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया है। यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो योजना के लक्ष्यों को पूरा करना मुश्किल होगा।



