डॉ. मोहन भागवत ने बालाघाट में कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की सराहना की। यह बहादुरी भारतीय संस्कृति और शौर्य की मिसाल है, जिसे उन्होंने अपने दौरे के दौरान जोर देकर बताया।
बालाघाट के कारंजा गांव में डॉ. मोहन भागवत का दौरा
6 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के लांजी क्षेत्र स्थित कारंजा गांव पहुंचे। वहां उन्होंने ‘बालासाहेब और भाऊराव देवरस स्मृति भवन’ का भव्य लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने ‘माधव नेत्रालय’ के नेत्र चिकित्सा एवं जांच केंद्र का शुभारंभ भी किया। इस कार्यक्रम में करीब 2,000 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी।
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कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की प्रशंसा
अपने संबोधन में डॉ. भागवत ने कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि फ्लाईदुबई विमान के इस भारतीय पायलट ने जब सह-पायलट के चाकू से गहरे घाव लगने के बावजूद भी यात्रियों की जान बचाई, तो यह भारतीय मिट्टी के संस्कारों की शक्ति का परिचायक था।
फ्लाईदुबई विमान घटना का विवरण
यह घटना तब हुई जब सह-पायलट ने मुख्य पायलट कैप्टन स्मित पर हमला किया और विमान को क्रैश करने का प्रयास किया। हालांकि, घायल होने के बावजूद स्मित ने सूझबूझ से विमान को सुरक्षित तरीके से उतारा। इस साहसिक कार्य से 174 यात्रियों की जान बच गई।
भारतीय मिट्टी और संस्कृति के संस्कार
डॉ. भागवत ने कहा कि भारतीय संस्कृति में दूसरों के लिए त्याग, सेवा और बलिदान की भावना गहरी है। कैप्टन स्मित ने इस भावना को अपने कार्य से जीवंत कर दिखाया है। यह उदाहरण युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा और देश की सुरक्षा भावना को मजबूत करेगा।

कार्यक्रम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कार्यक्रम की सुरक्षा के लिए 1,500 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। इनमें CRPF, हॉक फोर्स, जिला पुलिस बल और CISF शामिल थे। बालाघाट क्षेत्र नक्सल प्रभावित रहा है, इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
उपस्थित प्रमुख लोगों की भागीदारी
कार्यक्रम में माधव नेत्रालय के निखिल मुंडले, दीपक तामशेट्टीवार, डॉ. पवन स्थापत, अतुल शिरोलकर और पूर्वेंदु सक्सेना जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उन्होंने डॉ. भागवत के संबोधन को ध्यान से सुना और कैप्टन स्मित की बहादुरी को सराहा।
आम जनता पर प्रभाव और आगे की संभावनाएं
डॉ. भागवत का यह दौरा और कैप्टन स्मित की बहादुरी की कहानी स्थानीय लोगों में गर्व और सुरक्षा के प्रति विश्वास को बढ़ाएगी। इससे युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरणा मिलेगी। भविष्य में ऐसे उदाहरण राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के लिए अहम साबित होंगे।



