वोटर रजिस्ट्रेशन के फार्म-6 से हटाई गई माता-पिता की वोटर जानकारी की घोषणा ने नए मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को सरल बना दिया है। यह बदलाव भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा सितंबर 2026 में लिया गया है, जिसमें ऑनलाइन फॉर्म-6 से माता-पिता या पूर्वजों के वोटर विवरण से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा पत्र हटाने का आदेश दिया गया।
निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-6 से माता-पिता की वोटर जानकारी हटाने का निर्णय लिया
चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में शामिल अतिरिक्त घोषणा पत्र (Annexure-D) को हटाने का फैसला किया है। यह घोषणा सितंबर 2026 में हुई है। इसके तहत उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरी हो चुका है, नए मतदाताओं को अब माता-पिता या दादा-दादी के वोटर रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होगी।
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फॉर्म-6 में यह बदलाव आयोग के भीतर मतभेदों के बाद आया है। दो चुनाव आयुक्तों ने इस नियम के बिना वैधानिक संशोधन के लागू होने पर आपत्ति जताई थी।

जुलाई 2026 में जोड़ा गया था नया नियम
जुलाई 2026 में निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-6 में एक नया प्रावधान जोड़ा था। इसके तहत नए आवेदकों को अपने माता-पिता या दादा-दादी के मतदाता सूची में शामिल होने का ब्योरा देना अनिवार्य था। यह विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत किया गया था।
हालांकि, इस नियम को बिना कानूनी प्रक्रिया के लागू किए जाने पर विवाद उत्पन्न हुआ। इस कारण आयोग के कुछ सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई।
फॉर्म-6 और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का महत्व
फॉर्म-6 वह आधिकारिक दस्तावेज है जिसके माध्यम से कोई भी नागरिक पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराता है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया मतदाता सूची की गुणवत्ता और सत्यता सुनिश्चित करने के लिए होती है।
इस प्रक्रिया में वोटरों की सूची का गहन निरीक्षण कर गलत या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाया जाता है। SIR प्रक्रिया वाले राज्यों में फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र मांगा जाता था।

नए निर्णय से युवाओं को मिली राहत
फॉर्म-6 से माता-पिता की वोटर जानकारी हटाने से पहली बार वोटर आईडी के लिए आवेदन करने वाले युवाओं को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें इस अतिरिक्त जटिलता से गुजरना नहीं पड़ेगा।
यह कदम मतदाता पंजीकरण को आसान बनाता है और युवाओं को मतदान प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा।
जिन राज्यों में SIR प्रक्रिया अभी चल रही है, वहां नियम अस्थायी रूप से लागू रहेगा
हालांकि, जिन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में अभी भी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया अधूरी है, वहां इस अतिरिक्त घोषणा पत्र की मांग जारी रहेगी। यह अस्थायी प्रावधान माना गया है।
जैसे ही SIR प्रक्रिया समाप्त होगी, वहां भी फॉर्म-6 सामान्य रूप में प्रयोग होगा और अतिरिक्त घोषणा पत्र हट जाएगा।
निर्वाचन आयोग के फैसले का व्यापक प्रभाव
निर्वाचन आयोग का यह निर्णय मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाएगा। इससे मतदाता सूची में शामिल होने की प्रक्रिया में बाधाएं कम होंगी।
इसके अलावा, यह बदलाव निर्वाचन आयोग के नियमों को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करता है।



