नकुलनाथ का बड़ा दावा मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में कमलनाथ की हार हुई वोट चोरी से। छिंदवाड़ा के पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता नकुलनाथ ने 25 सितंबर 2026 को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर यह आरोप लगाया।
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से नकुलनाथ का समर्थन
नकुलनाथ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नई दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो साझा किया। राहुल गांधी ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कांग्रेस की तकनीकी टीम के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि 2023 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे सामान्य परिस्थितियों में संभव नहीं थे। नकुलनाथ ने इस वीडियो के साथ लिखा कि “असंभव था कमलनाथ जी का मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 हारना।”
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वोट चोरी की शुरुआत मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 से
नकुलनाथ ने आरोप लगाया कि इतने बड़े पैमाने पर वोट चोरी की योजनाबद्ध शुरुआत 2023 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से हुई थी। उन्होंने कहा कि कमलनाथ की हार सामान्य नहीं थी, बल्कि यह वोट चोरी का परिणाम थी। यह आरोप राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे रहा है।
2018 की मतदाता सूची से 24 लाख फर्जी नाम हटाए गए थे
नकुलनाथ ने 2018 के चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कांग्रेस ने शिकायत की थी, तब चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से करीब 24 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए थे। इनमें मृत, दोहरे और स्थानांतरित मतदाता शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 के चुनाव से पहले भी ऐसी शिकायतें हुईं, लेकिन चुनाव आयोग ने वह कार्रवाई नहीं की।

चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
नकुलनाथ ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि उसकी निष्क्रियता के कारण 2023 के चुनाव में करीब 33 लाख फर्जी मतदाता सूची में शामिल रहे। इससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुए। यह आरोप चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के परिणामों पर राजनीतिक प्रभाव
इस दावे के बाद मध्यप्रदेश की राजनीतिक स्थिति में हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस के अंदर भी कमलनाथ की हार को लेकर सवाल उठे हैं। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और सरकार को घेरा है। आम जनता के लिए यह चिंता का विषय है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
आगे की संभावनाएं और चुनाव सुधार की आवश्यकता
वोट चोरी के आरोपों ने चुनाव सुधार की जरूरत को उजागर कर दिया है। भविष्य में चुनाव आयोग को अधिक सख्ती और पारदर्शिता के साथ मतदाता सूची की जांच करनी होगी। तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल निगरानी के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया को मजबूत बनाना जरूरी है ताकि लोकतंत्र की रक्षा हो सके।



