इंदौर हाईकोर्ट ने लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर सख्त कार्रवाई का आदेश जारी किया है। यह आदेश ध्वनि प्रदूषण को रोकने और शहर में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि लाउडस्पीकर और डीजे की आवाज़ें निर्धारित सीमा से अधिक तेज़ हो रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है।
जनहित याचिका के माध्यम से लाउडस्पीकर की आवाज़ पर सवाल
यह मामला वर्ष 2023 में दायर जनहित याचिका से शुरू हुआ था। याचिका इंदौर के निवासी अमिताभ उपाध्याय और लेखक चिन्मय मिश्र ने अधिवक्ता अभिनव धानोडकर के जरिए दायर की थी। उन्होंने धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक सड़कों पर तेज आवाज़ में लाउडस्पीकर और डीजे बजाने पर रोक लगाने की मांग की थी।
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याचिका में ध्वनि प्रदूषण के कारण होने वाली सामाजिक और स्वास्थ्य समस्याओं को रेखांकित किया गया था।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सुनवाई कर आदेश जारी किया
इस मामले की अंतिम सुनवाई 22 सितंबर 2026 को हुई थी। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों की बात सुनने के बाद अपना आदेश 24 सितंबर 2026 को घोषित किया। अदालत ने प्रशासन की गतिविधियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि तेज आवाज़ें अधिकारियों को सुनाई नहीं दे रही हैं।
कोर्ट ने खुद भी निरीक्षण कर पाया कि लाउडस्पीकर निर्धारित सीमा से कहीं अधिक तेज आवाज़ में बज रहे थे। इस पर कोर्ट ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए।
प्रशासन और पुलिस को ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार, पुलिस प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि वे ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
कोर्ट ने एक हफ्ते के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियमों का उल्लंघन न हो।
साइलेंट ज़ोन के प्रति जनता को जागरूक करने के निर्देश
कोर्ट ने प्रशासन को यह भी निर्देश दिया कि वे मीडिया के माध्यम से जनता को साइलेंट ज़ोन के बारे में जागरूक करें। इसके अलावा आम लोगों को यह जानकारी भी दी जाए कि वे ध्वनि प्रदूषण की शिकायत कैसे और कहाँ कर सकते हैं।
इस कदम से जनता की भागीदारी बढ़ेगी और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।
मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 के तहत सख्त पालन की मांग
कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 के प्रावधानों का पालन सख्ती से कराने पर बल दिया है। यह अधिनियम ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है।
अधिनियम के तहत लाउडस्पीकर की आवाज़ की सीमा निर्धारित है, जिसे उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को निर्धारित
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित की है। अदालत इस सुनवाई में प्रशासन की कार्रवाई रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।
यह सुनवाई ध्वनि प्रदूषण से संबंधित मामलों में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



