भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने 24 सितंबर 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीतिक समझ बिल्कुल शून्य है और वे देश की राजनीतिक वास्तविकताओं से अनजान हैं।
राहुल गांधी की राजनीतिक समझ को लेकर सुधांशु त्रिवेदी का विवादित बयान
नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी खुद को 50 वर्षों से राजनीति समझने वाला बताते हैं, जबकि उनकी उम्र केवल 56 वर्ष है। उन्होंने इस बात पर तंज कसते हुए राहुल गांधी की राजनीतिक समझ को ‘शून्य’ बताया। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
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चुनाव आयोग पर राहुल गांधी के आरोपों का भाजपा ने किया खंडन
राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग के दो आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने की रिपोर्ट पर आरोप लगाने के बाद, सुधांशु त्रिवेदी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता के चुनाव आयोग और वोट चोरी के आरोपों का कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है। यह आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी हैं।
विपक्षी गठबंधन पर सुधांशु त्रिवेदी का तंज
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे अपनी सीट भी खुद के दम पर नहीं जीत पाते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के रायबरेली और अमेठी में समाजवादी पार्टी के समर्थन से जीतते हैं और केरल के वायनाड में मुस्लिम लीग के समर्थन के बिना चुनाव जीतना उनके लिए संभव नहीं है।

एंटी-इनकंबेंसी को लेकर सुधांशु त्रिवेदी का इतिहास के हवाले जवाब
राहुल गांधी के एंटी-इनकंबेंसी के दावे पर जवाब देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर बहुत मजबूत रही है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस 1967 के बाद से तमिलनाडु में, 1977 से पश्चिम बंगाल में और 1990 से उत्तर प्रदेश और बिहार में सत्ता में वापस नहीं आ पाई है। यह तथ्य राहुल गांधी के दावे की सच्चाई को चुनौती देता है।
पारदर्शी चुनाव और डिजिटल युग में कांग्रेस की स्थिति
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जब से देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव शुरू हुए हैं, सीसीटीवी कैमरों और स्वतंत्र मीडिया की भूमिका बढ़ी है, तब से कांग्रेस के लिए सत्ता में वापस आना लगभग असंभव हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी सुधारों ने राजनीतिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है।
राजनीतिक समझ और भविष्य की संभावनाएं
इस राजनीतिक घटनाक्रम से साफ है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच संवाद और आरोप-प्रत्यारोप जारी रहेंगे। सुधांशु त्रिवेदी के बयान ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो आगामी चुनावों में कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकते हैं। आम जनता पर इसका सीधा असर राजनीतिक स्थिरता और चुनावी रणनीतियों में बदलाव के रूप में दिख सकता है।



