मध्य प्रदेश के बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर के पास कोयला खदान को मंजूरी मिलने के बाद सियासी संग्राम तेज हो गया है। इस विवाद में मुख्य रूप से कोयला खदान के पास टाइगर कॉरिडोर को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एमपी सरकार से जवाब मांगा है।
जीतू पटवारी ने एमपी सरकार को सोशल मीडिया पर घेरा
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर के बेहद संवेदनशील क्षेत्र में कोयला खदानों को मंजूरी दी जा रही है। पटवारी ने कहा कि यह फैसला वन्यजीव संरक्षण के लिए खतरनाक है और इससे बाघों के आवागमन पर गंभीर संकट आएगा।
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कोयला खदान के पास टाइगर कॉरिडोर की दूरी पर उठे सवाल
जीतू पटवारी ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि मोहन यादव सरकार ने टाइगर कॉरिडोर से मात्र 6 किलोमीटर की दूरी पर वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन परियोजना को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि इससे बाघों के प्राकृतिक आवागमन का रास्ता बाधित होगा और यह पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है।
चार महीनों में चार कोयला खदान परियोजनाएं मिलीं मंजूरी
कांग्रेस का दावा है कि पिछले चार महीनों में बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर के आसपास चार अलग-अलग कोयला खदान परियोजनाओं को अनुमति दी गई है। इन खदानों की दूरी क्रमशः 53 मीटर, 1.5 किलोमीटर, 3.9 किलोमीटर और लगभग 6 किलोमीटर है। यह आंकड़े इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।

NTCA की चेतावनी के बावजूद मंजूरी पर सवाल
जीतू पटवारी ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की चेतावनी का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब NTCA ने इस टाइगर कॉरिडोर के टूटने पर गंभीर खतरा जताया था, तो राज्य सरकार ने किस आधार पर खनन की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि यह न केवल पर्यावरण की अनदेखी है, बल्कि वन्यजीवों के अस्तित्व को भी खतरे में डालने वाला कदम है।
भ्रष्टाचार के आरोप और सरकार की मंशा पर उठे सवाल
इस पूरे मामले पर जीतू पटवारी ने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या इस संवेदनशील क्षेत्र में पर्यावरण नियमों की अनदेखी कर कोई कमीशन या भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। पटवारी ने कहा कि यह मामला गंभीर जांच का विषय होना चाहिए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
आम जनता और वन्यजीव संरक्षण पर संभावित प्रभाव
वहीं, इस तरह की मंजूरियां आम जनता के लिए भी चिंता का विषय हैं। वन्यजीवों के आवागमन में बाधा आने से पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होगा। इससे आसपास के ग्रामीण इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है। इसलिए इस मामले में संतुलित और जिम्मेदार निर्णय जरूरी है ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों का संतुलन बना रहे।



