इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण की लापरवाही से स्कीम नंबर 171 और स्कीम नंबर 77 की कॉलोनियों से जुड़े करीब 6 हजार परिवार संकट में हैं। आज इन परिवारों का गुस्सा फूटकर सड़क पर आ गया। इसके बाद इन्हें इस विषय पर विशेष बोर्ड बैठक बुलाने का आश्वासन मिला है।
उल्लेखनीय है कि आईडीए की स्कीम 171 एवं 77 में करीब 33 वर्षों से लोग अपने प्लॉट-मकान के लिए भटक रहे हैं। ऐसे प्लॉटधारकों की संख्या करीब 6 हजार है। स्कीम 171 के लोगों से तो आईडीए ने स्कीम छोड़ने के एवज में विकास शुल्क के पैसे भी भरवा लिए, लेकिन स्कीम नहीं छोड़ी। इसी तरह स्कीम 77 को छोड़ने के बाद भी आईडीए ने डिनोटिफाई नहीं किया। बार-बार आश्वासन के बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो लोग सड़कों पर उतरकर आईडीए पहुंच गए और जमकर हंगामा मचाया।
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बड़ी संख्या में लोगों ने दिखाई ताकत
दोनों ही स्कीमों के लोगों ने प्रदर्शन की योजना काफी पहले से बना ली थी। टी-शर्ट, बैनर-पोस्टर भी बना लिए गए थे। आज सुबह करीब 10 बजे काफी संख्या में लोग आईडीए कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसमें बड़ी संख्या में युवा भी शामिल थे।
सीईओ को अंदर जाने नहीं दिया
दोनों ही स्कीमों के लोग आईडीए की सीढ़ियों पर बैठ गए थे। इस दौरान सीईओ परीक्षित झाड़े आए और वे भीड़ देख लिफ्ट से जाने लगे तो लोगों ने उन्हें घेर लिया। फिर उन्होंने आश्वासन दिया कि अक्टूबर में वे होने वाली बोर्ड बैठक में इस संबंध में चर्चा करेंगे। इसके बाद लोग नहीं माने और उनके साथ अंदर जाने लगे। यहीं स्कीम 171 के मंदूर पंचायत संस्था की कॉलोनी पुष्प विहार की तरफ से चतुर्वेदीजी, श्रीमहालक्ष्मी नगर की तरफ से पंकज जायसवाल, न्याय नगर की तरफ से गुप्ताजी, स्कीम 77 की कॉलोनी अयोध्यापुरी की तरफ से गौरशंकर लखोटिया ने ज्ञापन दिया।
171 में 13 और 77 में 17 संस्थाएं
उल्लेखनीय है कि स्कीम नंबर 171 में 13 सहकारी संस्थाएं हैं, जिनसे दर्जनों कॉलोनियां हैं। इसी तरह स्कीम 77 में 17 संस्थाएं हैं और उनसे जुड़ी कई कॉलोनियां हैं। इन संस्थाओं के प्लॉटधारक पिछले 33 साल से भटक रहे हैं, लेकिन आईडीए मामले का निराकरण नहीं कर रहा है।
कमिश्नर और कलेक्टर के पास जाने की तैयारी
गुरुवार को इन स्कीमों से जुड़े लोगों ने यह ठान लिया था कि आज चाहे कुछ भी हो जाए अपनी मांग मनवा कर ही दम लेंगे। इसीलिए आईडीए में प्रदर्शन के बाद रीगल होते हुए संभागायुक्त कार्यालय तथा वहां से फिर कलेक्टर कार्यालय जाने की योजना थी। लेकिन, आईडीए के अधिकारियों ने संभागायुक्त और कलेक्टर को भी यहीं बुलवा लिया।
विधायक हार्डिया ने जताई नाराजगी
महेंद्र हार्डिया ने कहा कि 25 साल तो मुझे सुनते हुए हो गए। मेरी ही बात नहीं सुन रहे हो। सीएम से भी बुलवा दिया कि स्कीम छोड़ रहे हैं। फिर अड़ंगा क्या है? कौन अधिकारी मना कर रहा है। आज जवाब दो।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे भी पहुंचे
रहवासियों के प्रदर्शन में शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे भी पहुंचे। उन्होंने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि देखते क्या करते हैं, नहीं तो 19 तारीख को राहुल गांधी इंदौर आ ही रहे हैं।
हार्डिया के साथ जनता भी आईडीए में
इसके बाद आईडीए अधिकारी विधायक हार्डिया को लेकर ऊपर चले गए। उनके साथ जनता भी अंदर पहुंच गई। इसके बात कॉलोनियों से जुड़े नेताओं को केबिन में बुलाया गया। संभागायुक्त भास्कर लक्षकार और कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि जो भी अड़चन है, उसे दूर करेंगे। कलेक्टर ने ऑडिट की बात उठाई तो प्लॉटधारकों ने कहा कि इसका ऑडिट से कोई लेनादेना नहीं है। वह मामला सहकारिता का है। आईडीए स्कीम तो छोड़ दे। इसके कारण बिल्डिंग परमिशन, एनओसी सब रुकी हुई है। पात्र अपात्र का फैसला सहकारिता करे।
युवाओं ने मांगा लिखित आश्वासन
प्रदर्शन में काफी संख्या में युवक-युवतियां भी शामिल हुए थे। उनका कहना है कि उनके दादा ने प्लॉट लिया, पिता जीवन भर भटकते रहे और अब वे भी भटक रहे हैं। वे आश्वसान सुनकर चुप नहीं हुए और उन्होंने लिखित में जवाब मांगा। इसके बाद आईडीए सीईओ ने लिखित आश्वासन दिया।
आईडीए ने विशेष बैठक बुलाने की बात कही
आईडीए ने लिखित में आश्वासन दिया कि योजना कमांक-171 एवं योजना क्रमांक-77 को व्यपगत किये जाने के संबंध में प्राधिकारी की बोर्ड बैठक अक्टूबर-2026 के द्वितीय सप्ताह या उससे पूर्व आयोजित की जाएगी। जब इस पर भी लोग नहीं माने तो अधिकारियों ने कहा कि अनुमति लेकर सितंबर माह में ही विशेष बैठक बुलाई जाएगी।
डेढ़ साल पहले भर दिया था पैसा
स्कीम 171 की कॉलोनी श्रीमहालक्ष्मी नगर के प्रतिनिधि पंकज जायसवाल ने बताया कि इसमें 13 गृह निर्माण संस्थाएं हैं। करीब डेढ़ साल पहले आईडीए ने स्कीम छोड़ने के एवज में विकास शुल्क जमा करने को कहा था। सभी संस्थाओं ने 5 करोड़ 84 लाख रुपए की राशि भर दी गई है। इसके अतिरिक्त जीएसटी की राशि भी भरी गई है। इसके बाद भी आईडीए लगातार मामला टालता जा रहा है।
स्कीम 77 तो 1988 में ही छोड़ दी थी
बताया जाता है कि आईडीए ने स्कीम 77 को 1988 में छोड़ दिया था। सिर्फ डिनोटिफाई करना बाकी है, जिसके लिए सालों से चक्कर लगवा रहे हैं। यहां के प्लॉटधारकों ने कहा कि आप अभी बोलें तो राशि जमा करा दें। स्कीम के कारण मकान निर्माण से लेकर सबकुछ अटका पड़ा है। हमारे पास रजिस्ट्री भी है।



