देश में स्वच्छता में आठ बार नंबर वन आने वाले इंदौर की हवा अब बिगड़ गई है. सफाई का हाल भी यही है.
दरअसल पिछले कुछ समय से इंदौर में सिर्फ हवा-हवाई काम ही हो रहे हैं. महापौर तो इसी मुगालते में हैं कि वे बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. उनसे अद्वितीय महापौर ना कोई हुआ है और ना होगा. उनके जैसे शहर हित के काम आजतक किसी ने नहीं किए. उनके पास जो विजन है वैसा किसी के पास नहीं.
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निगमायुक्त तो अलग ही अंदाज में हैं. कामकाज सम्भालने के बाद से लोग इंतजार कर रहे हैं कि वे कब मैदान में उतरेंगे, लेकिन वे कमरे से बाहर नहीं निकल पा रहे. ना नेता उन्हें समझ पा रहे और ना वे नेताओं को समझने की कोशिश कर रहे. अफसरी की अकड़ ऐसी कि शहर के गली मोहल्लों में जाते नहीं. अब ऐसे में शहर में गंदगी हो या हवा की बाट लग रही हो उनका इससे क्या वास्ता?
एक बात और प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री भी इसी शहर के हैं. यह वही मंत्री हैं जिनके इलाके में गंदे पानी से लोग दम तोड़ चुके हैं. इन्हें अपने बड़बोलेपन से ही फुर्सत नहीं.
बधाई हो आप सबको, जो इंदौर साफ हवा के मामले में एक नंबर से दूसरे नंबर पर आ गया.
…आपको इससे क्या फर्क पड़ने वाला, आप तो दूसरे दर्जे का पुरस्कार लेकर मुस्कराते हुए फोटो खिंचवाते रहिए.
हो सके तो रैली भी निकाल लीजिए, अवॉर्ड जो जीत कर आए हैं…



