हाईवे ब्लैक स्पॉट्स का खतरा इंदौर जिले के ग्रामीण राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ता जा रहा है, जहां 6 महीने में 27 मौतें हुई हैं।
इंदौर के ब्लैक स्पॉट्स पर बढ़ते हादसे
मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 15 ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए गए हैं। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच इन स्थलों पर 27 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 27 लोगों की मौत हुई।
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इन दुर्घटनाओं के कारणों में तेज रफ्तार और रॉन्ग-साइड ड्राइविंग शामिल हैं। इसके अलावा, स्ट्रीट लाइट्स की कमी और भारी वाहनों का दबाव भी हादसों का कारण बनते हैं।

इंदौर-देवास मार्ग का हाल
इंदौर-देवास रूट के शिप्रा थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-52 पर 4 सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट्स पाए गए हैं। इन जगहों पर तेज रफ्तार और भारी वाहनों का दबाव आम है।
यहां गोदाम और बड़े लॉजिस्टिक क्षेत्र के कारण भारी वाहनों की तादाद अधिक है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है।
सुप्रीम कोर्ट कमेटी की सख्ती
सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के चेयरमैन जस्टिस ए. एम. सप्रे ने एनएचएआई अधिकारियों से हादसों को रोकने के उपायों पर जवाब-तलब किया।
एनएचएआई ने इंदौर-खलघाट हाईवे को सिक्स लेन बनाने की योजना का हवाला दिया, लेकिन जस्टिस सप्रे ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि परियोजना पूरी होने तक लोगों की जान जोखिम में नहीं छोड़ी जा सकती।
तात्कालिक सुरक्षा उपायों की कमी
रिपोर्ट के अनुसार, एनएचएआई के पास इन खतरनाक ब्लैक स्पॉट्स को लेकर कोई त्वरित कार्ययोजना नहीं है। यह स्थिति स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय है।
इन ब्लैक स्पॉट्स पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए तत्काल प्रभावी सड़क सुधार की आवश्यकता है।
आम आदमी पर असर
हाईवे ब्लैक स्पॉट्स के कारण होने वाले हादसे आम लोगों के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
स्थानीय लोगों को सुरक्षित यात्रा का अधिकार है और इसके लिए प्रशासन को त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है।
आगे की राह
भविष्य में इन ब्लैक स्पॉट्स पर सुरक्षा उपायों को लागू किया जाना चाहिए। एनएचएआई को तत्काल कदम उठाते हुए सड़क सुरक्षा में सुधार करना चाहिए।
इस दिशा में सक्रियता से काम करने पर ही इन दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है।



