प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर शिक्षकों के साथ एक विशेष संवाद किया, जिसमें उन्होंने वक्तृत्व कला पर सलाह प्राप्त की। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षकों से मुलाकात की और उनसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।
वक्तृत्व कला पर प्रधानमंत्री की उत्सुकता
शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से वक्तृत्व कला पर सलाह मांगी। उन्होंने एक शिक्षिका से पूछा कि अगर वह उनके विद्यार्थी होते और एक अच्छा वक्ता बनना चाहते, तो उन्हें क्या करना चाहिए। शिक्षिका ने आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास को सबसे जरूरी बताया।
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शिक्षिका की प्रतिक्रिया और हंसी का माहौल
वक्तृत्व कला पर सलाह देते हुए शिक्षिका ने मजाकिया अंदाज में कहा कि प्रधानमंत्री के आभामंडल के सामने उनका आत्मविश्वास कम हो गया। इस पर प्रधानमंत्री समेत सभी ने ठहाके लगाए, जिससे पूरे हॉल में हंसी का माहौल छा गया।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के विजेता
इस वर्ष कुल 82 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से 48, उच्च शिक्षण संस्थानों से 21, और कौशल विकास मंत्रालय से 13 प्रशिक्षक शामिल हैं। यह पुरस्कार उनके विशेष योगदान के लिए दिया गया।

बच्चों के स्क्रीन टाइम पर चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अभिभावकों से संवाद करें और बच्चों को खेलकूद व रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें।
नशीले पदार्थों के मुद्दे पर चर्चा
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में बदलाव पर नजर रखने को कहा, ताकि उन्हें नशीले पदार्थों के खतरे से बचाया जा सके। बड़े शहरों और शिक्षण संस्थानों में यह समस्या बढ़ रही है, जिसे रोकने के लिए सतर्कता आवश्यक है।
बचपन और जिज्ञासा को जीवित रखने का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे सिर्फ पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें बल्कि छात्रों के जीवन का हिस्सा बनें। उन्होंने छात्रों के भीतर के बचपन और स्वाभाविक जिज्ञासा को जीवित रखने की अपील की।



