नई दिल्ली। थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान में पिछले सप्ताह हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना ने विमान सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। इस मामले में अब एक बड़ा अपडेट सामने आया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, उड़ान के दिल्ली पहुंचने के बाद किए गए अनिवार्य डोप टेस्ट में विमान के पायलट-इन-कमांड का परीक्षण साइकोएक्टिव पदार्थ के लिए पॉजिटिव पाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
मंत्रालय के अनुसार, पायलट के प्रारंभिक परीक्षण के बाद एक और जांच कराई गई है। इस दूसरी जांच के परिणाम आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है और जांच पूरी होने तक उन्हें फ्लाइट रोस्टर में शामिल नहीं किया गया है।
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हालांकि एअर इंडिया की ओर से कहा गया है कि अभी तक डोप टेस्ट के परिणाम आधिकारिक रूप से एयरलाइन के साथ साझा नहीं किए गए हैं। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

300 फीट नीचे आ गया था विमान
यह पूरा मामला 4 अगस्त की उस उड़ान से जुड़ा है, जो थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही थी। उड़ान के दौरान विमान अचानक तेज टर्बुलेंस की चपेट में आ गया। हवा के तीव्र झटकों के कारण विमान लगभग 300 फीट नीचे आ गया था।
विमान में कुल 137 यात्री और 8 चालक दल के सदस्य सवार थे। टर्बुलेंस के दौरान 17 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंचा, लेकिन इस घटना ने विमान संचालन और उड़ान सुरक्षा से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए।
टर्बुलेंस के दौरान विमान का अचानक ऊपर-नीचे होना संभव है, लेकिन जब ऐसी स्थिति गंभीर हो जाती है तो यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस घटना की विस्तृत जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डोप टेस्ट के नियम क्या कहते हैं?
विमान चालक दल के सदस्यों के लिए नशीले या साइकोएक्टिव पदार्थों का सेवन बेहद गंभीर सुरक्षा मामला माना जाता है। उपलब्ध नियमों के अनुसार, यदि किसी चालक दल सदस्य का पहली बार डोप टेस्ट पॉजिटिव आता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुनर्वास केंद्र भेजा जा सकता है। बाद में नेगेटिव परीक्षण के आधार पर ड्यूटी पर वापसी की प्रक्रिया हो सकती है।
यदि दूसरी बार ऐसा मामला सामने आता है तो पायलट का लाइसेंस तीन वर्ष तक निलंबित किया जा सकता है। तीसरी बार दोषी पाए जाने पर लाइसेंस रद्द किए जाने का प्रावधान बताया गया है।
हालांकि मौजूदा मामले में अंतिम कार्रवाई जांच और संबंधित परीक्षणों के परिणाम के आधार पर ही तय होगी।

मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान पर लेजर लाइट से खतरा
इसी बीच विमान सुरक्षा से जुड़ी एक और घटना सामने आई है। मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान MH-184 पर कोलकाता पहुंचने से पहले लेजर लाइट डाले जाने की शिकायत सामने आई। विमान कुआलालंपुर से कोलकाता आ रहा था और उसमें 159 यात्री सवार थे।
रिपोर्ट के अनुसार विमान को रात 11:20 बजे नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरना था, लेकिन घटना के बाद विमान को कुछ समय तक आसमान में चक्कर लगाना पड़ा। विमान करीब पांच मिनट की देरी से रात 11:25 बजे सुरक्षित रूप से हवाईअड्डे पर उतर गया।
लेजर लाइट पड़ने से पायलट की आंखों पर तेज रोशनी का असर पड़ सकता है और कुछ समय के लिए उसका ध्यान भटक सकता है। कम ऊंचाई पर उतरते समय ऐसी घटना बेहद खतरनाक हो सकती है।



